Thursday, November 28, 2019

Mercury Metal in Hindi / पारा धातु की जानकारी

 पारा धातु की जानकारी / Mercury Metal in Hindi

पारा (Mercury ) एक धातु है तथा रासायनिक रूप में यह एक तत्त्व है पारा चांदी के समान सफेद चमकदार धातु होती है यह सामान्य तापमान पर तरल (Liquid) अवस्था में होती है पारे का रासायनिक सिम्बल (Symbol ) Hg होता है पारे का परमाणु भार (Atomic Weight) 200.59 होता है, पारे का घनत्व (Density) 13.53 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है , पारे के परमाणु में 80 इलेक्ट्रान, 80 प्रोटोन, और 121 न्यूट्रॉन होते है। पारा माइनस 38.87 डिग्री सेल्सियस पर तरल से ठोस अवस्था में बदल जाता है तथा यह 356.58 डिग्री सेल्सियस पर उबलने लगता है। 


पारे का उपयोग प्राचीन काल से ही किया जाता आ रहा है इसलिए पारे की खोज किसके द्वारा की गयी यह अज्ञात है। 
पारा
पारा / Mercury

पारा धातु के गुण


पारा सामान्य तापमान पर पर तरल अवस्था में पायी जाने वाली सफेद चमकदार धातु है। 

पारे के परमाणुओं के मध्य कमजोर बॉन्ड या बंधन होते है जिसके कारण पारे के परमाणु आपस में बहुत मजबूती से नहीं जुड़े होते तथा इस बंधनों को तोड़ने के लिए बहुत कम गर्मी की जरुरत होती है इसी कारण  पारा सामान्य तापमान पर तरल अवस्था में पाया जाता है। 

पारा माइनस 38.87 डिग्री सेल्सियस पर तरल से ठोस अवस्था में बदल जाता है ठोस अवस्था में पारे घनत्व 13.53  ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर से बढ़ कर 14.18  ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर हो जाता है।

ठोस अवस्था में पारे का आयतन लगभग 3.59 % कम हो जाता है। 

ठोस अवस्स्था में पारा मेलिएबल, डक्टाइल तथा नरम धातु होती है जिसे चाकू के सहायता से आसानी से काटा जा सकता है। 

पारा, सोना चांदी एलुमिनियम जैसी अन्य धातुओं से मिलकर मिश्र धातु बनाता है जिसे अमलगम कहते है लेकिन पारा सभी धातुओं के साथ अमलगम नहीं बनाता। 

लोहा और कुछ अन्य धातु पारे के साथ अमलगम नहीं बनती है इसी कारण पारे को रखने के लिए लोहे के पात्र का प्रयोग किया जाता है। 

पारा शुद्ध एलुमिनियम से बहुत ही आसानी से क्रिया करके अमलगम बना लेता है जिसके कारन एलुमिनियम बहुत ही शिघ्रता से नस्ट होने लगता है इसी कारण पारे को हवाई जहाजों में ले जाना वर्जित होता है ताकि हवाई जहाजों को पारे से होने वाले नुक्सान से बचाया जा सके। 

पारा हवा से अभिक्रिया नहीं करता लेकिन पारे को गर्म करने पर पारा हवा में उपस्थित ऑक्सीजन से क्रिया करके मरकरी ऑक्साइड (HgO) बनता है जो की लाल रंग का पाउडर जैसा पदार्थ होता है। 
पारा जयादातर एसिड से अभिक्रिया नहीं करता लेकिन पारा आक्सीकारक अम्ल (Acid ) जैसे नाइट्रिक एसिड सल्फुरिक एसिड और एक्वा रेगिआ एसिड (अमलराज ) से क्रिया करता है और उनमे घुल जाता है।

पारे की सरफेस टेंशन बहुत अधिक होती है इसी कारन पारा जमींन पर गिरने पर पानी की तरह फैलने के बजाए बूंदो का रूप ले लेता है।

पारे को खुले में रखने पर यह सामान्य तापमान पर धीरे धीरे वाष्पीकृत हो जाता है।

पारा बहुत ही विषैला पदार्थ माना जाता है पारा शरीर में खुले घाव द्वारा, साँस द्वारा और त्वचा द्वारा सीधे ही प्रवेश कर सकता है।  पारा शरीर में जाकर तंत्रिका तंत्र (Nervous system) , लीवर और किडनियों को नस्ट कर देता है।

पारे की ताप सुचालकता बहुत अच्छी नहीं होती है अर्ताथ कम होती है।

पारे की विद्युत सुचालकता मध्यम होती है।

पारा धातु के उपयोग 

पारा तापमान में हलके से परिवर्तन के प्रति भी संवेदनशील होता है, पारा तापमान में मामूली वृद्धि से भी फ़ैल जाता है और तापमान में मामूली कमी से सिकुड़ जाता है, पारे में यह फैलाव और सिकुड़न एकरूपता से होता है अर्ताथ पारा तापमान में एक डिग्री वृद्धि पर जितना फैलता है उतना ही एक डिग्री तापमान में कमी पर सिकुड़ जाता है पारे के इस गुण के कारण पारे का उपयोग थर्मोमीटर बनाने में होता है।

पारे का उपयोग ब्लड प्रेशर मीटर ( Sphygmomanometer) बनाने में किया जाता है।

पारे के अधिक घनत्व (High Density ) के कारण पारे का उपयोग वायुदाबमापी ( Barometer ) बनाने में होता है।

पारे का उपयोग प्रेशर गेज (Manometer) बनाने में किये जाता है, इसका उपयोग गैसों का प्रेशर/ दबाव  मापने में किया जाता है।

पारे की वाष्प का उपयोग फ्लोरोसेंट लेम्प जैसे ट्यूब लाइट तथा CFL बनाने में किया जाता है।

पारे का उपयोग मरकरी आर्क रेक्टिफायर/वाल्व बनाने में किया जाता है इसका उपयोग हाई वोल्टेज अलटरनेट करंट (AC करंट ) को डायरेक्ट करंट (DC करंट ) में बदलने के लिए किया जाता है।

पारे का उपयोग सोना चांदी के शुद्धिकरण में किया जाता है।

पारे का उपयोग बैटरी बनाने में भी किया जाता है।

पारे का उपयोग बेधशाला (Observatory) में टेलिस्कोप के लिए तरल लेंस बनाने के लिए किया जाता है इसके लिए पारे को किसी बड़े पात्र में भरकर एक धुरी (Axis) पर धीरे धीरे गोल घुमाया जाता है जिससे अपकेंद्रीए बल (Centrifugal Force) और गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण पारा पात्र में पैराबोलिक (Parabolic) लेंस का रूप ले लेता है इस प्रकार बना हुआ यह लेंस बहुत ही परिशुद्ध होता है जो की बहुत ही आसानी से बन जाता है यदि इस स्तर की परिशुध्दता का समान आकार का पैराबोलिक लेंस किसी काँच से बनाया जाये तो इसमें बहुत अधिक समय लगता है और इसकी कीमत भी कई गुना अधिक हो जाती है।

पारे का उपयोग लिक्विड कॉन्टैक्ट इलेक्ट्रिकल स्विच बनाने में किया जाता है।

पारे को चांदी के साथ मिलाकर दांतो की कैविटी भरने के उपयोग में लिया जाता है परन्तु आजकल पारे के हानिकारक गुणों का पता चलने के कारण इस प्रकार दांतो में इसके उपयोग में लगातार कमी आती जा रही है तथा कई देशों में इस पर प्रतिबन्ध भी लगाया जा चुका है।

पारे का उपयोग लिक्विड इलेक्ट्रोड के रूप में क्लोरीन और कास्टिक सोडा के उत्पादन में भी किया जाता है।

रोचक तथ्य

भारतीय रसायन शास्त्री पंडित कृष्णपाल शर्मा ने 27 मई 1942 को बिरला हाउस दिल्ली में 1 तोला पारे को 1 तोला स्वर्ण में परिवर्तित करके दिखाया था इस घटना के साक्षी श्री ए बी ठक्कर (प्रेसिडेंट ऑल इंडिया हिन्दू सेवक संघ ), श्री दत्तजी (सेक्रटरी बिरला मिल्स, दिल्ली), श्री खेमका (चीफ इंजीनियर ) आदि रहे, इस घटना का उल्लेख बिरला मंदिर दिल्ली के शिलालेख पर दर्ज है। 
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पारे का घनत्व लोहे से अधिक होता है इसलिए पारा लोहे से अधिक भारी होता है इसलिए लोहे के सिक्के या लोहे की कोई भी वस्तु पारे में डालने पर वह पारे के ऊपर तैरने लगती है।

पारा एकमात्र धातु है जो की रूम टेम्प्रेचर यानी 22 डिग्री सेल्सियस पर तरल अवस्था में पाया जाता है।

दुनिया में पारे का सर्वाधिक उत्पादन चीन में किया जाता है वर्ष 2016 में लगभग 4000 मीट्रिक टन पारे का उत्पादन चीन में किया गया था। 

पारा एलुमिनियम के संपर्क में आने पर एलुमिनियम को नस्ट कर देता है इसलिए पारे को हवाई जहाज में ले जाना वर्जित होता है। 

सोना और चांदी पारे के संपर्क में आने पर ये पारे में घुल जाते है। 

पारा धातु के हानिकारक प्रभाव 

पारा एक अत्यंत खतरनाक धातु है पारे को विश्व स्वस्थ्य संघटन (WHO) द्वारा 10 सबसे खतरनाक केमिकल की सूचि में रखा गया है। पारा हवा में खुला छोड़ने पर यह धीरे धीरे हवा में वाष्पीकृत होने लगता है जिससे यह सांस के द्वारा शरीर में प्रवेश कर जाता है पारे की बहुत थोड़ी मात्रा भी शरीर में तंत्रिका तंत्र को नस्ट कर देती है जिससे मस्तिष्क सम्बंधित कई रोग हो सकते है तथा लकवा (Paralysis) भी हो सकता है  इसके अलावा यह हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े लिवर और किडनियों को भी भारी नुक्सान पहुँचता है, पारे के हानिकारक प्रभाव के कारण मानसिक रूप से कमजोर बच्चे पैदा होते है जिनकी सोचने और समझने की क्षमता बहुत कमजोर होती है । पारा हवा में बहुत धीरे धीरे वाष्पीकृत होता है पारे की थोड़ी सी मात्रा को वाष्पीकृत होने में कई हफ्तों का समय लग सकता है जिससे कई हफ्तों तक वातावरण विषैला बना रह सकता है। 

पारे का प्रदुषण एक बहुत गंभीर वैश्विक समस्या है, सोने के शुद्धिकरण में पारे का उपयोग से और फ्लोरोसेंट लैम्प जैसे ट्यूबलाइट, सीएफएल आदि में पारे के उपयोग के कारण बहुत अधिक मात्रा में पारे का प्रदुषण होता है। जब फ्लोरोसेंट लैंप ( ट्यूबलाइट, सीएफएल) को फेंका जाता है तो इसमें उपस्थित पारे की वाष्प पानी में या भूमि में अवशोषित हो जाती है जिससे पारा पानी से मिलकर मिथाइल मरकरी नमक बहुत जहरीला पदार्थ बनता है यह पदार्थ पेड़ पौधो द्वारा या जलीय वनस्पति द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है जब इन वनस्पतियो को कीड़ो, मछलियों या शाकाहारी जीवो द्वारा खाया जाता है तो यह उनमे पहुँच भी जाता है और अंत मे जब इन जीवो को मनुष्यों द्वारा खाया जाता है तो यह मनुष्यों में भी पहुँच जाता है इस प्रकार यह पारा खाद्य श्रंखला के 8 से 10 स्तरो तक नुक्सान पंहुचा सकता है। इसलिए पारे के खतरे से बहुत ही सावधानी से निपटने की जरुरत है। 

दुनिया में बहुत से देशों ने पारे के उपयोग पर प्रतिबन्ध लगा रखा है पारे के प्रदुषण को रोकने के लिए 90 से अधिक देशों ने मीनामाटा संधि (Minamata Convention) पर हस्ताक्षर किये है। 

  

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