Sunday, December 22, 2019

कैल्शियम के स्रोत फायदे और कमी के लक्षण Calcium Rich Food in Hindi

Calcium Rich Food in Hindi कैल्शियम के  फायदे स्रोत और कमी के लक्षण  

कैल्शियम क्या है 

कैल्शियम हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक खनिज है तथा कैल्शियम हमारे शरीर में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला खनिज भी है हमारे शरीर में उपस्थित कैल्शियम का 99 % भाग हमारी हड्डयों और दांतो में पाया जाता है हड्डीओं और दांतो की मजबूती के लिए कैल्शियम अत्यंत आवश्यक होता है कैल्शियम हमारी दांतो और हड्डयों को घना और मजबूत बनता है, कैल्शियम हमारे शरीर में रक्त संचरण में मदद करता है, कैल्शियम हमारी माँसपेसियो के क्रियान्वन और नियंत्रण में सहायक होता है, कैल्शियम शरीर की ग्रंथियों से हार्मोन उत्सर्जन में सहायक होता है तथा कैल्शियम हमारे मस्तिष्क के संदेशो को हमारे शरीर के सभी अंगो तक लाने तथा ले जाने में भी मदद करता है।



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कैल्शियम के स्रोत 

हमारे शरीर में कैल्शियम नहीं बनता है इसलिए हमें भोजन के माध्यम से कैल्शियम ग्रहण करना पड़ता है हमारे शरीर में कैल्शियम की कमी होने पर हमारा शरीर हमारी हड्डियों से कैल्शियम अवशोषित करके उसकी पूर्ति करने लगता है जिससे हमरी हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और हमारी हड्डियां कमजोर हो जाती है। 
हमारे शरीर में विटामिन डी शरीर की कैल्शियम के अवशोषण में सहायता करता है अर्ताथ यदि हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी होती है तो हमारे द्वारा प्रचुर मात्रा में कैल्शियम युक्त भोजन करने पर भी वह कैल्शियम हमारे शरीर द्वारा अवशोषित नहीं किया जाता विटामिन डी की उपस्थिति में ही हमारे द्वारा ग्रहण किया गया कैल्शियम हमारे शरीर के उपयोग में आता है।  

कैल्शियम की आवश्यकता 

एक वयस्क व्यक्ति अपनी त्वचा, बाल, नाख़ून, मल-मूत्र तथा पसीने के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 300mg कैल्शियम खो देता है जिसकी पूर्ति के लिए और शरीर की अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 1000 mg से 1200 mg कैल्शियम की आवश्यकता होती है।

हमारे शरीर की सभी मांसपेशियों का नियंत्रण कैल्शियम के कारन ही होता है इसमें हृदय की मांसपेशी भी शामिल है कैल्शियम के द्वारा ही मस्तिष्क से शरीर की सभी माँसपेशिओ तक संदेशो और सूचनाओं का आदान प्रदान तंत्रिका तंत्र द्वारा संभव हो पाता है।

कुछ पोषक तत्व शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त उपस्थिति पर ही शरीर के लिए उपयोगी हो पाते है तथा कैल्शियम शरीर में कई एन्जाइमों का सहकारक है अर्ताथ ये एन्जाइम कैल्शियम की उपस्थिति के बिना उचित प्रकार से कार्य नहीं कर सकते है।

कैल्शियम की सबसे अधिक आवश्यकता दांतो और हड्डियों को होती है हड्डियाँ जीवित उत्तक होती है हमारे शरीर का 99 % कैल्शियम हमारी हड्डियों में जमा रहता है हड्डियाँ हमारे शरीर की कैल्शियम बैंक की तरह होती है हड्डियों में निरंतर कैल्शियम का अवशोषण और अपघटन होता रहता है जब हमारे शरीर में कैल्शियम की कमी होती है तो हमारा शरीर कैल्शियम की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए हमारी हड्डियों से कैल्शियम अवशोषित करने लगता है जिससे हमारी हड्डिया कमजोर होने लगती है यदि लम्बे समय तक कैल्शियम की कमी बनी रहती है तो हमारी हड्डियों और दांतो का विघटन हो सकता है जिसके परिणामस्वरूप हमारी हड्डियों में फ्रैक्चर और विकृति का खतरा बहुत बढ़ जाता है अत्यंत गंभीर मामलो में ऑस्टियोपोरोसिस नाम की हड्डियों की गंभीर बीमारी भी हो सकती है।

इसी तरह जब हम पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम का सेवन करते रहते है तो यह कैल्शियम हमारी हड्डियों में जमा होता रहता है जिससे हमारी हड्डिया और दांत मजबूत बने रहते है परन्तु जब हम आवश्यकता से अधिक कैल्शियम लम्बे समय तक  ग्रहण करते रहते है तो कैल्शियम की अधिकता के कारन भी कई तरह के रोग हो सकते है जिनके बारे में आगे वर्णन किया गया है।

कैल्शियम हमारे शरीर में घाव होने के बाद सामान्य खून के थक्के ज़माने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कैल्शियम की कमी के कारण

शरीर में कैल्शियम की कमी रातोंरात नहीं होती कैल्शियम की कमी बहुत लम्बे समय तक शरीर को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम प्राप्त नहीं होने पर होती है जिसके कई कारन हो सकते है जिनमे से कुछ इस प्रकार है :-

  • लम्बे समय तक यदि पर्याप्त कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थो का सेवन नहीं किया जाता तो इससे शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। 
  • ऐसे लोग जिन्हे लैक्टोस से एलर्जी (डेयरी के उत्पादों से एलर्जी) होती है उनमे प्रायः कैल्शियम की कमी पायी जाती है। 
  • बहुत लम्बे समय तक अधिक मात्रा में कॉफ़ी या एलकोहॉल का सेवन करने से शरीर में कैल्शियम के कमी हो जाती है। 
  • शरीर में विटामिन डी की कमी होने पर शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। 
  • शरीर में मेग्नीशियम की कमी होने पर भी शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है।  
  • शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी जैसे पैराथाईराइड हार्मोन, टेस्टोस्टेरोन हार्मोन तथा एस्ट्रोजन हार्मोन के स्त्राव में गड़बड़ी होने पर शरीर में कैल्शियम के साथ साथ विटामिन डी की भी कमी हो जाती है। 
  • वेगन (Vegan) लोगों को कैल्शियम की कमी का खतरा अधिक होता है वेगन लोग ऐसे लोग होते है जो पशुओ से प्राप्त चीजे जैसे मांस, अंडा, दूध, दही, शहद आदि किसी भी चीज का सेवन नहीं करते है यहां तक की वेगन लोग पशुओ से प्राप्त चमड़ा, उन, सिल्क, फर आदि से बने कपडे भी नहीं पहनते है। 
  • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कैल्शियम की आवश्यकता अधिक होती है यदि इस समय महिलाओं को पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं मिलता तो शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। 
  • महिलाओ में रजोनिवृति (Menopause) के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है जिससे शरीर की कैल्शियम अवशोषित करने की क्षमता कम हो जाती है इससे कैल्शियम की कमी हो जाती है। 
  • पाचन तंत्र में गड़बड़ी, किडनी के समस्या तथा थाइराइड की समस्या होने पर भी शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है। 

कैल्शियम की कमी के लक्षण 



शरीर में कैल्शियम बहुत सारी क्रियाओ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसलिए कैल्शियम की कमी के लक्षण भी बहुत सारे और अलग अलग होते है जी की इस प्रकार है :-
  • हड्डियों की कमजोरी के कारन फ्रैक्चर होना ऑस्टोपेनिया तथा ऑस्टेपोरोसिस जैसे रोग होने शरीर में कैल्शियम की अत्यधिक कमी के संकेत होते है। 
  • बच्चो का उम्र के लिहाज से पर्याप्त शारीरिक विकास नहीं होना कैल्शियम की कमी का एक संकेत हो सकता है। 
  • मानसिक भ्रम, अवसाद तथा अकारण चिंता का होना कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है। 
  • ब्लड प्रेश , अनियमित धड़कन जैसे अन्य हृदय सम्बंधित रोग होना कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है। 
  • कमजोर नाख़ून, भंगुर नाख़ून भी कैल्शियम की कमी के संकेत हो सकते है। 
  • माँसपेशिओ में ऐठन होना तथा माँसपेशिओ का काँपना भी कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है।
  • खून का थक्का जमने में कठिनाई होना भी कैल्शियम की कमी का संकेत हो सकता है। 

कैल्शियम के स्रोत

  • दूध और दूध से निर्मित सभी प्रकार के उत्पाद जैसे दही, पनीर, छाछ, लस्सी, मावा आदि कैल्शियम के बहुत अच्छे स्रोत होते है। 
  • सभी प्रकार की दालें और सभी प्रकार के अनाज कैल्शियम के बहुत अच्छे स्रोत होते है। 
  • सभी प्रकार से सूखे मेवे और चने, मूंगफली भी कैल्शियम के बहुत अच्छे स्रोत होते है। 
  • हरी सब्जियां जैसे पालक, मेथी, हरा धनिया,पत्तागोभी, ककड़ी, सेम फली, ग्वारफली, भिंडी आदि कैल्शियम के बहुत अच्छे स्रोत होते है। 
  • आम, अमरुद, केला, संतरा, टमाटर, अंजीर, खजूर आदि कैल्शियम के अच्छे स्रोत है। 
  • नारियल, गुड़, गन्ना, शकरकंदी, प्याज आदि भी कैल्शियम के बहुत अच्छे स्रोत होते है। 
  • सूरज की धुप को भी कैल्शियम  के स्रोत रूप में कहा जा सकता है क्योकि सूरज की धुप से हमें विटामिन डी मिलता है और विटामिन डी हमारे शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है 

कैल्शियम की अधिकता के नुक्सान

शरीर में किसी भी पोषक तत्व की अधिकता हानिकारक होती है इसी तरह कैल्शियम की अधिकता के कारण भी कई प्रकार की समस्याएं हो सकती है जो की इस प्रकार है :-
  • शरीर में कैल्शियम की अधिकता के कारण किडनी में पथरी जम सकती है किडनी में पथरी की अधिकता से किडनी क्षतिग्रस्त भी हो सकती है। 
  • शरीर में कैल्शियम की अधिकता होने पर रक्त में अधिक कैल्शियम उपस्थित होता है इस अतिरिक़्त कैल्शियम को शरीर से बहार निकलने के लिए किडनियों को ज्यादा काम करना पड़ता है जिसके फलस्वरूप बार बार पेशाब आने की समस्या हो जाती है जिसके कारन शरीर में पानी की कमी हो जाती है तथा बहुत अधिक प्यास लगने लगती है। 
  • लम्बे समय तक शरीर में कैल्शियम की अधिकता के कारण किडनी की खून साफ़ करने की क्षमता कम हो सकती है अत्यंत गंभीर मामलो में किडनी अपना काम करना बंद भी कर सकती है  जिसे किडनी का फेल होना भी कहते है। 
  • शरीर में कैल्शियम की अधिकता होने पर पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है इससे पेटदर्द होना, मितली आना, उलटी आना, तथा कब्ज होना जैसे लक्षण दिख सकते है। 
  •  शरीर में कैल्शियम की अधिकता होने पर ह्रदय सम्बंधित रोग हो सकते है ह्रदय की धड़कन अनियमित हो सकती है। 
  • कैल्शियम की अधिकता होने पर इसका तंत्रिका तंत्र और मस्तिक्ष पर बुरा प्रभाव पड़ता है इससे मानसिक रोग जैसे  मानसिक भ्रम, अवसाद तथा जड़ बुद्धि आदि के लक्षण आ सकते है। 
  • शरीर में कैल्शियम के अधिकता होने पर थकान और कमजोरी जैसे लक्षण भी आ सकते है। 

कैल्शियम की अधिकता के कारण 

शरीर में कैल्शियम की अधिकता के कई कारण हो सकते है जिनमे से कुछ इस प्रकार है :-

हाइपरकैल्सीमिया रोग होने पर 

हाइपरकैल्सीमिया रोग होने पर हमारी हड्डियों में से कैल्शियम निकल कर हमारे रक्त में घुलने लगता है जिससे जिससे हमारे रक्त में तो कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है परन्तु इससे हमारी हड्डिया कमजोर हो जाती है।  

लम्बे समय तक असक्रियता की स्थिति 

ऐसे लोग जिनकी दिनचर्या में बहुत अधिक घूमना फिरना नहीं होता या जो दिन का अधिकांश समय बैठे-बैठे या बहुत कम सक्रिय रहकर बिताते है ऐसी स्थिति लम्बे समय तक बने रहने पर शरीर की हड्डियों पर अधिक जोर नहीं पड़ता जिसके कारण हड्डियां कमजोर होने लगती है और हड्डियों का कैल्शियम घुल कर रक्त में मिलने लगता है जिससे रक्त में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है इस स्थिति को हड्डियों का घुलना भी कहते है। 
उदाहरण :- अंतरिक्ष यात्री जो लम्बे समय तक अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS ) पर रहते है वे लम्बे समय तक भारहीन वातावरण में रहते है इस कारन उनकी हड्डियों पर किसी भी प्रकार का कोई भार नहीं पड़ता जिसके कारन अंतरिक्ष यात्रियों की हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और वे कमजोर हो जाती है। 

शरीर में पानी की बहुत अधिक कमी होना 

शरीर में पानी की गंभीर कमी (Severe Dehydration) होने पर रक्त में उपस्थित कैल्शियम का अनुपात (Concentration) बढ़ जाता है जिससे कैल्शियम की मात्रा रक्त में बढ़ जाती है।  

पैराथायराइड ग्रंथि का अतिसक्रिय होना 

पैराथायराइड ग्रंथि हमारे शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करने का काम करती है जब यह ग्रंथि अतिसक्रिय हो जाती है तो शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है। पैराथायराइड ग्रंथि की अतिसक्रियता को हाइपरपैराथायरोडिजम कहते है आमतौर पर हाइपरपैराथायरोडिजम रोग 50 - 60 वर्ष के लोगो में देखा जाता है तथा यह रोग पुरुषो की तुलना में महिलाओं में तीन गुना अधिक पाया जाता है। 

अन्य कारण 

थाइराइड सम्बंधित रोग, किडनी सम्बंधित रोग तथा कुछ प्रकार के कैंसर होने पर भी शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है।

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