Monday, December 16, 2019

आयरन के फायदे स्रोत और कमी के लक्षण Iron ke Fayde Srot or Kami Ke Lakshan

Iron ke Fayde Srot or Kami Ke Lakshan  आयरन के फायदे स्रोत और कमी के लक्षण 

लोहा या आयरन एक खनिज होता है जो कई खादय पदार्थो में प्राकतिक रूप से पाया जाता है  शरीर में उपस्थित कुल आयरन का 70 % भाग शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं (हीमोग्लोबिन) और मांसपेशियों की कोशिकाओ (मायोग्लोबिन)  में पाया जाता है , आयरन शरीर में रक्त निर्माण के लिए एक आवश्यक तत्त्व होता है आयरन पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचने के लिए लाल रक्त कोशिकाओं की मदद करता है तथा यह शरीर में उपस्थित कार्बनडाइऑक्सइड को फेफड़ो के द्वारा शरीर से बहार निकलने में भी लाल रक्त कोशिकाओं की मदद करता है, आयरन शारीरिक विकास, मस्तिष्क विकास, नुरोलॉजिकल विकास, कोशिकाओं के कामकाज, माँसपेशिओ के चयापचय (Metabolism) तथा कुछ हार्मोनों के संश्लेषण के लिए आवश्यक है इनके अलावा आयरन शरीर में और भी बहुत सारी महत्वपूर्ण रासायनिक क्रियाओ में मदद करता है।


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आयरन के स्रोत 
एक सामान्य वयस्क पुरुष शरीर में लगभग 4 ग्राम आयरन होता है जबकि एक सामान्य वयस्क महिला के शरीर में 3.5 ग्राम आयरन होता है। हमारे द्वारा जो आयरन ग्रहण किया जाता है उसकी आवश्यकता के अतिरिक्त मात्रा हमारे लिवर में जमा (स्टोर) होती रहती है और जब हमारे भोजन में आयरन की कमी होती है तो हमारे लिवर में जमा आयरन से हमें इसकी पूर्ति होती रहती है परन्तु अधिक समय तक आयरन रहित भोजन करते रहने पर हमारे शरीर के आयरन भंडार समाप्त हो जाते है और हमारे शरीर में आयरन की कमी हो जाती है।

हमारे लिवर में एक सिमा तक ही आयरन जमा होता है लिवर में सामान्य से अधिक आयरन जमा होने पर यह अग्नाश्य (Pancreas) और हार्ट में एकत्र होने लगता है जिसके कारण इन अंगो की कार्य प्रणाली में बाधा उत्पन्न होने लगती है जिस कारन इन अंगो से सम्बंधित कई प्रकार के रोग होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। 

आयरन के प्रकार 

आहार में लेने योग्य आयरन दो प्रकार का होता है जिसे हेम आयरन (Heme Iron) और नॉन हेम (Non-Heme Iron) कहतें है। हेम आयरन मांस, मछली, मुर्गी, बीफ, और समुद्री भोजन आदि में पाया जाता है इसलिए हेम आयरन ऐसा आयरन होता है जो हमें पशु प्रोटीन से प्राप्त होता है जबकि नॉन हेम आयरन पेड़ पोधो पर आधारित खाद्य पदार्थो से प्राप्त होता है जैसे की अनाज, सब्जियाँ, सेम, फल, सूखे मेवे , और बीज आदि।

हेम आयरन बहुत ही आसानी से शरीर द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है इसलिए हेम आयरन वाले पदार्थो का आवश्यकता से अधिक सेवन करने पर शरीर में आयरन की मात्रा बढ़ने लगती है जिससे कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, मेटाबोलिक सिंड्रोम आदि रोग होने का खतरा बढ़ जाता है इसके विपरीत नॉन हेम आयरन जो पेड़ पोधो से प्राप्त होता है शरीर द्वारा आवश्यकता के अनुरूप धीरे धीरे अवशोषित किया जाता है तथा अतिरिक्त नॉन हेम आयरन शरीर द्वारा अवशोषित नहीं किया जाता है जिससे आयरन की अधिकता से होने वाले रोग होने की संभावना बहुत कम हो जाती है।

आयरन की आवश्यकता 



शरीर में आयरन की कमी के कारन एनीमिया रोग हो जाता है इस रोग में शरीर में रक्त की कमी हो जाती है एनीमिया के कई कारण हो सकते है जैसे की उचित मात्रा में आहार न लेना, आहार में आयरन और अन्य पोषक तत्वों की कमी होना, कम समय में बार-बार रक्तदान करना, शरीर में आयरन का अवशोषण कम होना तथा अत्यधिक रक्त की हानि होना आदि इनके अलावा महिलाओ में गर्भ धारण के बाद आयरन की कमी हो सकती है।  शरीर में आयरन की कमी होने पर रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है हीमोग्लोबिन का प्रमुख कार्य शरीर की सभी कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुंचना होता है इसलिए हीमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन कम पहुँचती है जिससे शरीर लगातार कमजोर और थका हुआ महसूस होता है, व्यक्ति की किसी भी चीज पर ध्यान देने (Concentration Power) की क्षमता कम हो जाती है तथा चिड़चिड़ापन भी हो सकता है।

शरीर में आयरन की कमी कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है, शरीर का तापमान बनाए रखने में भी कठिनाई हो सकती है।

बच्चो के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आयरन बहुत जरुरी होता है बच्चो में आयरन की कमी के कारन बच्चो की खेल कूद में तथा पढ़ाई में रूचि कम हो सकती है  इसके कारन बच्चो के स्कूल के प्रदर्शन में कमी आ सकती है।

महिलाओं को आयरन की आवश्यकता पुरुषो की तुलना में अधिक होती है महिलाओं में मासिक धर्म के दौरन होने वाले रक्त के नुक्सान के कारण महिलाओ को आयरन की अधिक आवश्यकता होती है इसके अलावा महिलाओ को गर्भावस्था के दौरान शरीर में भ्रूण के विकास और रक्त की बढ़ती मांग के कारण आयरन की जरुरत इतनी अधिक बढ़ जाती है की गर्भवती महिलाओ को आयरन के सप्लीमेंट्स भी दिए जाते है। यदि गर्भावस्था के दौरान महिला को पर्याप्त आयरन नहीं मिलता तो इसका बहुत बुरा प्रभाव होने वाले बच्चे पर पड़ता है इससे बच्चा मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर पैदा होता है।

कठोर शारीरिक परिश्रम करने वाले लोगो और एथिलीटों को आयरन की आवश्यकता अधिक होती है तथा महिला एथिलीटों को आयरन की आवश्यकता और भी अधिक होती है। एथिलीटों में आयरन की कमी के कारन माँसपेशिओ में ऑक्सीजन की कमी के कारण शारीरिक थकान हो सकती है जिससे उनके प्रदर्शन पर बुरा असर पड सकता है इसके अलावा शाकाहारी एथिलीटों को आयरन की कमी का खतरा अधिक होता है।

आयरन की कमी के लक्षण

आयरन की कमी के कुछ लक्षण इस प्रकार है :-

हमेशा थकान और कमजोरी रहना 

शरीर में आयरन की कमी होने पर हमेशा थकान और कमजोरी महसूस होती रहती है इसका कारन होता है शरीर की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलना। हमारे शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा बनाने के लिए ऑक्सीजन की जरुरत होती है और जब हमारे शरीर में आयरन की कमी होती है तो हमारे रक्त में पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बनता और हीमोग्लोबिन ही हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका तक ऑक्सीजन पहुंचने का कार्य करता है इसलिए हीमोग्लोबिन की कमी के कारण हमारे शरीर की कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जिससे हमें थकान और कमजोरी महसूस होती है।

तेजी से साँसे लेना 



शरीर में आयरन की कमी के कारण रक्त में हीमोग्लोबिन कम बनता है और इससे हमारे शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों तक ऑक्सीजन कम पहुँचती है जिसके कारण हमारा शरीर अधिक ऑक्सीजन प्राप्त करने की कोशिश करता है फलसवरूप हमारी साँसों की दर बढ़ जाती है हम तेजी से छोटी-छोटी साँसे लेने लगते है। इसलिए आयरन की कमी के कारण सीढ़ियां चढ़ना या थोड़ा पैदल चलना जैसे छोटे काम करने पर भी हमारी साँसे बहुत तेजी से फूलने लगती है, यदि इस प्रकार के संकेत शरीर में दिखें तो ये लक्षण आयरन की कमी के कारण हो सकते है।

त्वचा का पीला होना 

शरीर में आयरन की कमी के कारण रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है हीमोग्लोबिन ही हमारे रक्त को लाल रंग प्रदान करता है जिसके कारण हमारी त्वचा हलकी गुलाबी दिखाई देती है इसलिए हीमोग्लोबिन की कमी के कारन हमारी त्वचा पिले रंग की दिखाई देने लगती है इसलिए यदि त्वचा पिली दिखाई दे तो यह शरीर में आयरन की कमी का लक्षण हो सकता है।

हृदय की धड़कन तेज होना तथा घबराहट होना 

शरीर में आयरन की कमी होने पर रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है तथा हमारे शरीर की कोशिकाओं तक ऑक्सीजन कम पहुँचती है जिसकी पूर्ति करने के लिए ह्रदय को अधिक काम करना पड़ता है परिणामस्वरूप इससे हृदय की धड़कन बढ़ जाती है और हमें घबराहट महसूस होने लग सकती है। हृदय की धड़कन तेज होने के कई और कारन भी हो सकते है परन्तु यदि लगातार ह्रदय की धड़कन तेज बनी रहे तो यह आयरन की कमी का एक संकेत हो सकता है।

सिरदर्द होना तथा चक्कर आना 

शरीर में आयरन की कमी से मस्तिष्क में ऑक्सीजन कम पहुँचती है जिससे मस्तिष्क में रक्त वाहिकाएं सूज सकती है जिससे सिरदर्द हो सकता है तथा चक्कर भी आ सकते है हालांकि सिरदर्द और चक्कर आने के और भी कई कारण हो सकते है लेकिन बार बार सिरदर्द और चक्कर आना शरीर में आयरन की कमी के संकेत हो सकते है।

अन्य लक्षण 

सुखी त्वचा और क्षतिग्रस्त बाल भी शरीर में आयरन की कमी के संकेत हो सकते है क्योकि आयरन की कमी होने पर शरीर सिमित ऑक्सीजन को शरीर के महत्वपूर्ण अंगो तक भेजता है जिससे बाल और त्वचा ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति से वंचित हो जाते है जिससे त्वचा और बाल शुष्क और कमजोर हो जाते है जिससे बाल झड़ने की समस्या भी हो सकती है।

 सर्दियों में हाथ और पैर बहुत ठन्डे रहना भी आयरन की कमी का संकेत हो सकता है।

शरीर में आयरन की कमी होने पर चेहरा और जीभ पिले दिखने लगते है तथा जीभ में सूजन आ जाती है जिससे जीभ मोटी महसूस होने लगती है। कई बार इससे मुँह में छाले भी हो सकते है।

आयरन की कमी होने पर नाखूनों पर पपड़ी के रूप में दरारें पड़ जाती है तथा कुछ विशेष मामलो में नाख़ून बिच में से धँस जाते है और किनारो से उठ जाते है जिससे नाखुनो में गड्डे पड़ जाते है और नाख़ून चम्मच के सामान दिखने लगते है। ऐसे नाखूनों को स्पून शेप नाख़ून (Spoon-Shaped Fingernails) कहा जाता है। अतः नाखून में गड्डे पड़ना भी आयरनकी कमी का लक्षण हो सकता है।

आयरन की कमी के कारण पैरो में थकान बनी रह सकती है इसे रेस्टलेस सिंड्रोम कहा जाता है इसमें पैरो में अजीब सी सनसनाहट और खुजली रह सकती है इससे पैर हमेशा थके हुए से लगते है यह स्थिति रात में बहुत बदतर हो जाती है जिसमे लेटने पर भी पैरो को आराम नहीं मिलता है तथा पैरो की स्थिति बार-बार बदल-बदल कर सोना पड़ सकता है जिससे नींद आने में भी बहुत दिक्कत आ सकती है ।

शरीर में आयरन की कमी होने पर मिटटी या चाक खाने की प्रबल इच्छा हो सकती है।

बार-बार बिमार होना तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता का कमजोर हो जाना भी आयरन की कमी का लक्षण हो सकता है।

आयरन के स्रोत्र 

शरीर में आयरन की पूर्ति के लिए शाकाहारी और मांसाहारी दोनों ही प्रकार के आहार लिए जा सकते है जो की इस प्रकार है :-

शाकाहारी आहार (Vegetarian Diet)

सभी प्रकार की दालें
हरी पत्तेदार सब्जियाँ :- जैसे पालक, मेथी, ब्रोकली, मटर, सभी प्रकार की फलियाँ आदि
सब्जियाँ :-  जैसे आलू, टमाटर, गोभी, चकुंदर, शक्करकंदी आदि
बीन्स :- जैसे राजमा, काले चने, काबुली चने, मूंगफली आदि
सूखे मेवे :-  जैसे काजू, बादाम , किसमिश, पिस्ता, खजूर, मुनक्का, अंजीर, सुखी खुबानी आदि
फल :-  जैसे अनार, सूखे सेब, एवाकाडो आदि
अन्य :- जैसे शहद गुड़, जई, मेथी दाना, डार्क चॉकलेट, अंकुरित अनाज, वाइट बटन मशरूम, सोयाबीन, सुखे नारियल, सूरजमुखी के बीज आदि

मांसाहारी आहार (Non-veg Diet)

 रेड मीट, ऑयस्टर्स सिप, लिवर, टूना मछली, साल्मन मछली, समुद्री भोजन, चिकन आदि 

शरीर में आयरन की अत्यधिक कमी होने पर आयरन से भरपूर चीजों का सेवन करने के साथ-साथ विटामिन C से भरपूर चीजों का भी सेवन करना चाहिए क्योकि विटामिन C का सेवन करने से शरीर की आयरन अवशोषित करने की क्षमता बढ़ जाती है।    

आयरन की अधिकता के नुक्सान 

शरीर में आयरन की अधिकता होने पर यह शरीर को नुक्सान पहुंचने लगता है शरीर में आयरन की अधिकता को आयरन पॉइजनिंग (Iron Poisoning) भी कहते है आयरन की अधिकता होने पर लिवर, अग्नाशय और हृदय सम्बंधित कई घातक रोग होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है जिनमे से कुछ इस प्रकार है  :-
  • लिवर में अधिक आयरन स्टोर होने पर लिवर डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। 
  • लिवर में अधिक आयरन  जमा होने पर यह हृदय में जमा होने लगता है जिससे ह्रदय की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती है जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। 
  • शरीर में आयरन की अधिकता होने पर यह अग्नाशय में जमा होने लगता है जिसके कारन अग्नाशय में उपस्थित इन्सुलिन हार्मोन बनाने वाली कोशिकाएं नस्ट होने लगती है जिसके कारन शरीर में इन्सुलिन हार्मोन की कमी हो जाती है जिससे मधुमेह (Diabetes) रोग हो जाता है। 
  • आयरन की अधिकता के कारन गठिया रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। 
  • आयरन की अधिकता से शरीर का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है जिससे भूक कम लगती है और शरीर में कमजोरी आ जाती है 

आयरन अधिकता के कारण 

  • आवश्यकता से अधिक मात्रा में आयरन युक्त भोजन करने से शरीर में आयरन की अधिकता हो जाती है। 
  • ऐसे नॉनवेज आहार जिनमे हेम आयरन (Heme Iron) की मात्रा ज्यादा होती है उनको अधिक मात्रा में  खाने से शरीर में आयरन की अधिकता हो जाती है क्योकि हेम आयरन शरीर में बहुत आसानी से अवशोषित हो जाता है। 
  • अधिक मात्रा में शराब पिने से शरीर की आयरन अवशोषित करने की क्षमता बहुत अधिक बढ़ जाती है जिससे लिवर में बहुत अधिक आयरन जमा होने लगता है जिससे लिवर डैमेज होने तथा लिवर कैंसर होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। 
  • शरीर में विटामिन C की अधिकता से भी शरीर में आयरन की अधिकता हो जाती है क्योकि विटामिन C शरीर में आयरन अवशोषण में सहायक होता है। 
  • हेमोक्रोमैटोसिस रोग होने पर शरीर में आयरन का अवशोषण बढ़ जाता है यह रोग अनुवांशिक होता है जो माता पिता से बच्चो में पहुंच जाता है। 

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