Thursday, December 5, 2019

Platinum Metal in hindi / प्लैटिनम धातु की जानकारी

प्लैटिनम धातु की जानकारी / Platinum Metal in Hindi


प्लैटिनम एक धातु है यह रासायनिक रूप में एक तत्त्व है, यह अत्यंत दुर्लभ और कीमती धातु है यह चांदी के समान सफ़ेद रंग की चमकदार धातु होती है, प्लैटिनम एक घनी/भारी (Dense), मैलिएबल, डक्टाइल, रासायनिक रूप से निष्क्रिय (Nonreactive), धातु होती है। इसका सिम्ब्ल (Symbol) Pt होता है, इसका परमाणु भार (Atomic Weight) 195.08 होता है, इसका परमाणु संख्या क्रमांक (Atomic Number) 78  है, इसके परमाणु में 78 प्रोटोन 78 इलेक्ट्रान 117 न्यूट्रॉन होते है, प्लैटिनम का घनत्व 21. 45 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है। प्लैटिनम सामान्य तापमान पर ठोस होता है तथा यह 1772 डिग्री सेल्सियस (Melting Point) पर पिघलती है तथा 3827  डिग्री सेल्सियस (Boiling Point) पर यह उबलने लगती है। 



प्लैटिनम
प्लैटिनम 


प्लैटिनम, प्लैटिनम समूह (Platinum Group)  के 6 दुर्लभ तत्वों में से एक तत्त्व है, प्लैटिनम ग्रुप के अन्य तत्त्व रुथेनियम, रोडियम, पैलेडियम, ओस्मियम, इरिडियम है।  प्लैटिनम ग्रुप के सभी तत्वों के भौतिक गुण और रासायनिक गुण लगभग समान होते है और ये सामान्यतः खनिजों में एक साथ ही पाये जाते है। 

प्लैटिनम की खोज 1557 में इटैलियन साइंटिस्ट जूलियस स्कालिगेर (Julius Scaliger) ने की थी। 

प्लैटिनम धातु के गुण 

प्लैटिनम नरम तथा मैलिएबल धातु है परन्तु इसकी मैलिएबलिटी सोने तथा चांदी से कम होती है। 

प्लैटिनम सर्वाधिक डक्टाइल धातु होती है प्लैटिनम की 1 ग्राम मात्रा से बिना टूटे 16500 मीटर लम्बा तार बनाया जा सकता है जिसकी मोटाई लगभग 0.0006 MM होती है। 

प्लैटिनम एक रासायनिक रूप से निष्क्रिय धातु है जिसके कारण प्लैटिनम पर जंक नहीं लगता। प्लैटिनम उच्च तापमान पर भी हवा में उपस्थित ऑक्सीजन के अभिक्रिया नहीं करती जिससे ये उच्च तापमान पर भी जंकरोधी बनी रहती है। 

प्लैटिनम धातु अधिकांश पदार्थो से अभिक्रिया नहीं करता परन्तु प्लैटिनम 120 डिग्री के तापमान पर साइनाइड (Cyanide) में घुल जाता है इसके अलावा प्लैटिनम सल्फर और हैलोजन्स (Halogens) से भी अभिक्रिया करता है। हैलोजन्स आवर्त सरणी (Periodic Table) के ग्रुप 17 के पांच टॉक्सिक (Toxic) एलिमेंट होते है जो की फ्लोरिन, क्लोरीन, ब्रोमिन, आयोडीन, अस्टेटिन है



प्लैटिनम धातु ज्यादातर अम्लों (Acids) से प्रतिरोध करता है परन्तु यह गर्म अम्लराज (Aqua Regia) में घुलनशील होता है। एक्वा रेगिआ (Aqua Regia) या अम्लराज नाइट्रिक एसिड और हाइड्रोक्लोरिक एसिड का 1 : 3 अनुपात का मिश्रण होता है।

प्लैटिनम धातु ऑस्मियम (घनत्व 22. 587 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर ) और इरीडियम (घनत्व 22. 56   ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर ) के बाद तीसरी सबसे भारी धातु है प्लैटिनम का घनत्व 21. 45 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है।

प्लैटिनम धातु पर हवा और पानी का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ता है।

प्लैटिनम धातु की उपस्थति में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण में विस्फोट हो जाता है।

प्लैटिनम के स्वाभाविक रूप से 6 आइसोटोप पाए जाते है जिसमे से प्लैटिनम - 194 सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है। 

प्लैटिनम बहुत मजबूत और टिकाऊ होता है यह अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक ठण्ड में भी तनाव प्रतिरोधी होता है अर्ताथ प्लैटिनम अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक ठण्ड में भी न तो अधिक फैलता है और न ही अधिक सिकुड़ता है तथा अपने आकर को बनाये रखता है इसलिए प्लैटिनम से बने गहने लम्बे समय तक टिकाऊ बने रहते है।

प्लैटिनम में एंटी एलर्जीक गुण होते है इसलिए प्लैटिनम से बने गहने किसी भी एलर्जी से पीड़ित व्यक्ति भी आसानी से पहन सकता है।

प्लैटिनम धातु के उपयोग

प्लैटिनम धातु का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग ऑटोमोबाइल उद्योग में होता है, प्लैटिनम के द्वारा वाहनों के लिए कैटेलिटिक कनवर्टर बनाया जाता है यह गाड़ियों के एग्जॉस्ट (Exhaust) में लगाया जाता है, कैटेलिटिक कनवर्टर गाड़ियों से निकलने वाली जहरीली गैसों को कम हानिकारक गैसों में परिवर्तित कर देता है जिससे प्रदूषण कम होता है।
कैटेलिटिक कनवर्टर के अंदर मधुमक्खी के छत्ते (Honeycomb) जैसी सिरेमिक से बनी जाली होती है जिस पर प्लैटिनम और पैलेडियम धातुओं की परत होती है जब इंजिन का धुआँ इस जाली में से होकर गुजरता है तो यह कार्बन मोनोऑक्साइड को कार्बन डाईऑक्साइड में बदल देता है, हाइड्रोकार्बन को कार्बन डाईऑक्साइड और पानी में बदल देता है तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड को नाइट्रोजन और ऑक्सीजन में बदल देता है।

प्लैटिनम धातु का उपयोग पेट्रोलियम इंडस्ट्री में भी किया जाता है प्लैटिनम धातु से बने कैटेलिटिक कच्चे तेल (Crude Oil ) से पेट्रोल (Gasoline) और अन्य ईधन निकलने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है।

प्लैटिनम धातु  का उपयोग कंप्यूटर की हार्डडिस्क बनाने में होता है।

प्लैटिनम धातु का उपयोग फाइबर ऑप्टिक केबल बनाने में होता है।

प्लैटिनम धातु का उपयोग एंटी कैंसर दवाइयाँ बनाने में होता है तथा कीमोथेरिपी में भी प्लैटिनम का उपयोग किया जाता है।

प्लैटिनम धातु का उपयोग दन्त चिकित्सा में भी किया जाता है।

प्लैटिनम का उपयोग उर्वरक (Fertilizers) और विस्फोटक (Explosives) निर्माण के लिए अमोनिया से नाइट्रिक एसिड बनाने के लिए किया जाता है।

प्लैटिनम धातु का उपयोग उच्च गुणवक्ता के गहने बनाने में किया जाता है।

प्लैटिनम धातु का उपयोग उच्च गुणवक्ता के अत्यंत कीमती चश्मे बनाने के लिए किया जाता है।

प्लैटिनम धातु का उपयोग कांच उद्योग में क्रूसिबल और लाइनर बनाने के लिए किया जाता है क्योकि प्लैटिनम का मेल्टिंग टेम्प्रेचर बहुत अधिक होता है तथा यह निष्क्रिय धातु होने के कारण पिघले हुए कांच से कोई रासायनिक अभिक्रिया नहीं करता है।

प्लैटिनम धातु का उपयोग LCD डिस्प्ले निर्माण के लिए काँच और फाइबरग्लास रीइंफोर्स प्लास्टिक बनाने के लिए किया जाता है।

प्लैटिनम से बने कैटेलिटिक कनवर्टर का उपयोग फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी में किया जाता है।

प्लैटिनम का उपयोग पानी के जहाजों और समुद्र के अंदर पाइपलाइनॉ पर एनोड के रूप में किया जाता है जिससे इन्हे समुद्र के खारे पानी से जंक लगने से बचाया जा सके।

मिसाइल के नोज कोन, जेट इंजन के फयूल नोजल तथा अन्य उपकरणों पर प्लैटिनम की कोटिंग की जाती है जिससे वो उच्च तापमान पर भी लम्बे समय तक कुशलता से काम कर सके।

प्लैटिनम निष्क्रिय तथा एंटी एलर्जिक धातु होती है, इसकी इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी भी अच्छी होती है तथा इसके द्वारा बनाये गए छोटे आकर के पुर्जे भी काफी मजबूत और टिकाऊ होते है इस सब खूबियों के कारन प्लैटिनम का उपयोग शरीर के अंदर लगने वाले उपकरण जैसे पेसमेकर, स्टंट्स, इम्प्लांटेबल कार्डिओवेर्टर डेफीब्रीलेटर (ICD) आदि उपकरण बनाने में किया जाता है।

प्लैटिनम धातु के रोचक तथ्य 

अक्सर यह समझा जाता है की प्लैटिनम को ही वाइट गोल्ड कहा जाता है परन्तु यह केवल एक भ्रान्ति है प्लैटिनम और वाइट गोल्ड अलग-अलग धातु होती है। बहुत से लोग यह नहीं जानते की वाइट गोल्ड प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता इसे पिले गोल्ड, पैलेडियम और सिल्वर आदि धातुओं के मिश्रण से बनाया जाता है।

प्लैटिनम पानी से लगभग 21 गुना अधिक भारी तथा लोहे से लगभग 3 गुना अधिक भारी धातु होती है।

किलोग्राम का अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोटाइप IPK  (International Prototype of Kilogram) जिसके द्वारा पूरी दुनिया में 1 किलोग्राम का भार निर्धारित किया जाता है वह प्रोटोटाइप एक गोलाकार सिलिंडर के रूप में बनाया गया है जिसका व्यास (Diameter) और लम्बाई (Height) एक सामान 39 मिलीमीटर है यह सिलिंडर प्लैटिनम और इरीडियम की मिश्र धातु से बनी है जिसमे लगभग 90 % प्लैटिनम है और 10 % इरीडियम है। यह प्रोटोटाइप सेंट-क्लाउड, फ्रांस में रखा गया है

इसी तरह मीटर का अंतर्राष्ट्रीय प्रोटोटाइप (International Prototype of Meter) जिसके द्वारा पूरी दुनिया में 1 मीटर की दुरी निर्धारित की जाती है वह एक X  आकर की छड़ (Rod) है जो की प्लैटिनम और इरीडियम की मिश्र धातु से बनी है जिसमे लगभग 90 % प्लैटिनम है और 10 % इरीडियम है। यह फ्रांस के पेरिस शहर में राखी गयी है।

एक अनुमान के मुताबिक कुल प्लैटिनम उत्पादन का केवल 25% ही गहने बनाने में और निवेश में उपयोग होता है बाकि 75% प्लैटिनम उत्पादन का उपयोग उद्योगों में होता है।

प्लैटिनम का मेल्टिंग पॉइंट लोहे के मेल्टिंग पॉइंट से भी लगभग 200 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है।

प्लैटिनम का उत्पादन 


दुनिया में 5 प्रमुख प्लैटिनम उत्पादक देश है जो की साउथ अफ्रीका, रूस, ज़िम्बाब्वे, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका है इसमें से साउथ अफ़्रीका देश में दुनिया के कुल प्लैटिनम उत्पादन का 70 % उत्पादन होता है जो की वर्ष 2018 में लगभग 110 मीट्रिक टन था।


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