Tuesday, May 26, 2020

किसान खेत से अतिरिक़्त कमाई कैसे करें

किसान खेती से अतिरिक़्त आमदनी कैसे करें

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हमारे देश में अधिकतर किसान जब खेतो में कोई फसल बोते है, तो वे आमदनी के लिए पूरी तरह से उसी फसल पर निर्भर हो जाते है। जिसके कारण यदि वो फसल ख़राब होती है या फसल के उत्पादन या भाव में कमी आती है, तो किसान को बहुत नुक्सान हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योकि अधिकतर किसान उस फसल के अलावा ऐसा कुछ भी नहीं करते जिससे उनकी उस फसल के अलावा भी अतिरिक्त आमदनी हो सके।

कोई भी किसान अपने खेत में खेती के साथ-साथ ऐसे बहुत से काम कर सकते है, जिससे उनकी अतिरिक्त कमाई हो सकती है। ऐसे बहुत से कार्य है जो किसान अपने खेत में खेती के साथ साथ कर सकते है उनमे से कुछ इस प्रकार हैं :-

गुलाब की खेती

किसान अपनी फसल के साथ-साथ खेत के चारों ओर गुलाब के पौधे लगा सकते है, गुलाब के पौधे बहुत कम लगत में लगाए जा सकते है। गुलाब के पौधों की आयु 6 से 8 वर्ष तक होती है इसलिए एक बार पौधे लगाने पर ये पौधे कई वर्षों तक फूल देते रहते हैं। गुलाब के पौधों से बहुत अच्छी कमाई भी की जा सकती है जिसके कुछ तरीके इस प्रकार हैं :-
  • गुलाब के फूल बाजार में प्रति स्टिक के हिसाब से बेचे जा सकते है, बहुत से किसान 10 से 15 रूपए प्रति स्टिक के हिसाब से फूल बेचते है जिससे बहुत अच्छी कमाई हो जाती है।
  • गुलाब के फूलों को प्रति किलो के हिसाब से भी बाजार में बेचा जा सकता है। बाजार में गुलाब को  50 से 60 रूपए प्रति किलो के हिसाब से बड़ी आसानी से बेचा जा सकता है।
  • गुलाब के फूलो की पत्तियों को सुखाकर भी इन्हे बाजार में बहुत अच्छी कीमत में बेचा जा सकता है।
  • यदि गुलाब के फूल बाजार में न बिकें तो इन फूलों से बहुत ही कम लगत में गुलकंद भी बनाया जा सकता है, गुलकंद बहुत वर्षो तक ख़राब भी नहीं होता है तथा गुलकंद को बहुत ही अच्छी कीमत में बाजार में बेचा जा सकता है।  


पपीते की खेती

किसान अपनी फसल के साथ साथ पपीते की खेती भी कर सकते है, किसान अपने खेत के चारों ओर पपीते के पेड़ लगा सकते हैं। पपीते के पौधे बड़ी आसानी से तैयार किये जा सके है तथा इन्हे बहुत अधिक देखभाल की भी जरुरत नहीं होती। पपीते की फसल 10 -12 महीनों में तैयार हो जाती है।  पपीते के पेड़ की आयु ढाई वर्ष तक होती है तथा एक पेड़ से दो बार फसल ली जा सकती है।

पपीते की एक पेड़ से एक बार में लगभग 40 से 45 किलो फसल प्राप्त होती है, जिसे 15 से 20 रूपए प्रति किलो के हिसाब से बड़ी आसानी से बेचा जा सकता है। यदि खेत के चारो तरफ पपीते के 100 पेड़ भी लगा लिए जाये तो हर साल 75 से 90 हजार रूपए की अतिरिक्त आमदनी बड़ी आसानी से प्राप्त की जा सकती है।

अरहर दाल की खेती

किसान अपने खेत में लगी किसी भी फसल के साथ अरहर दाल की खेती भी कर सकते है। किसान अपने खेत के चरों तरफ अरहर की दाल लगा सकते है। अरहर की दाल का पौधा 5 - 6 फ़ीट ऊंचा होता है तथा एक पौधे से 6 से 8 किलो तक अरहर की दाल प्राप्त की जा सकती है।

अरहर की दाल एक नकदी फसल है इसे बेचने में कोई दिक्कत नहीं आती है तथा इसका मूल्य भी बहुत अच्छा मिलता है।

अरहर की दाल के पौधे की जड़ों में नाइट्रोजन इखट्टा करने की क्षमता होती है जिससे खेत को उर्वरा शक्ति बढ़ती है तथा इसे स्वयं खाद की जरुरत नहीं होती है। अरहर के पौधे सुख जाने पर इनसे लकड़ी भी प्राप्त होती है जो कई प्रकार के काम ली जा सकती है।

मधुमक्खी पालन

मधुमक्खी पालन कम लगत में किया जाने वाला एक बहुत अच्छा व्यवसाय है। कोई भी किसान अपने खेत में किसी भी फसल के साथ-साथ मधुमक्खी पालन का कार्य भी कर सकता है। खेत में मधुमक्खी पालन करने से किसान को अतिरिक्त आमदनी तो होती ही है, इसके अलावा मधुमक्खी पालन करने से खेत में लगी किसी भी फसल के उत्पादन में वृद्धि हो जाती है जिससे किसान को दोहरा फायदा होता है।

कोई भी किसान 5 से 10 बॉक्स के साथ इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकता है। मधुमक्खी के एक बक्से से साल में 50 से 70 किलो तक शहद निकलता है जिससे किसान की बहुत अच्छी आमदनी हो जाती है। बहुत से किसान अपने खेतों में सैकड़ो बक्से लगाकर हर साल लाखों रूपए की अतिरिक्त कमाई करतें है। कोई भी किसान अपने क्षेत्र या जिले के कृषि विज्ञानं केंद्र से मधुमक्खी पालन की पूरी जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकते है और इस व्यवसाय की शुरुआत कर सकतें है।

प्लांट नर्सरी व्यवसाय

किसान अपने खेत के एक छोटे हिस्से में पौधों की नर्सरी लगाकर बहुत अच्छी कमाई कर सकतें हैं। नर्सरी में अच्छी किस्म के बीजों से सजावटी पौधे, फूलों के पौधे और फलों के पौधे तैयार करके बेचे जाते हैं। प्लांट नर्सरी में इन पौधों को तब तक बड़ा किया जाता है जब तक वे घरों या बगीचों लगाने लायक नहीं हो जाते, उसके बाद इन पौधो को तैयार करके व्यापारिक उद्देश्य से बेचा जाता है और बहुत अच्छी कमाई की जाती है।

इसके अलावा बहुत से लोग प्लांट नर्सरी में अपनी स्वयं की रिसर्च करके अधिक उत्पादन देने वाली फसलों के पौधे और बीज भी तैयार करते है और उन्हें बहुत अच्छे दामों में बेचते है।

कीमती वृक्षों के खेती

बहुत से किसान अपने खेतो में चन्दन और महोगनी जैसे वृक्षों के खेती करते है। ये कीमती वृक्ष होते है तथा इनकी लकड़ी बहुत महंगी बिकती है, इन वृक्षों को तैयार होने में 15 से 18 वर्ष तक का समय लगता है और तैयार होने के बाद एक-एक वृक्ष लाखो रूपए में बेचा जाता है। इन वृक्षों के चोरी होने का भय हमेशा लगा रहता है इसलिए बहुत कम किसान इन वृक्षों की खेती करने का साहस जुटा पाते है, परन्तु यदि इन वृक्षों की खेती की जाये तो इनसे बहुत अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है।

 इन वृक्षों की खेती से सम्बंधित जानकारी इंटरनेट और क्षेत्र के कृषि विज्ञानं केंद्र से प्राप्त की जा सकती है।


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