Wednesday, June 3, 2020

जायदा मुनाफा देने वाली फसलों की जानकारी Profitable Crops in Hindi

जायदा मुनाफा देने वाली फसलों की जानकारी

Profitable Crops in Hindi

हमारे देश में जयादातर किसान पारम्परिक फसलों की खेती करते है, जिससे उन्हें सिमित मुनाफा ही हो पता है। परन्तु कुछ किसान ऐसी फसलों की खेती करते है जो बहुत अधिक मुनाफा देती है तथा उनमें मेहनत और लगत भी बहुत कम लगते है। ऐसी फसलों की जानकारी ज्यादातर किसानों की नहीं होती है, जिससे वो अधिक मुनाफा कमाने से वंचित रह जाते है।

इसलिए हम आपको कुछ ऐसी फसलों की जानकारी देने जा रहें है जिन्हे लगाकर आप बहुत अच्छी आमदनी कर सकते है।

बांस की खेती / Bamboo Farming

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बांस को उन्नति का पेड़ भी कहा जाता है। बांस की खेती के बारे में बहुत कम लोगो को जानकारी होती है। बांस सबसे जल्दी बढ़ने वाला पौधा होता है बांस के पेड़ की लम्बाई 25 फ़ीट के आसपास होती है। बांस का उपयोग बहुत सी जगह किया जाता है जिसके कारण इसकी डिमांड में कभी कोई कमी नहीं आती है।

बांस का उपयोग फर्नीचर बनाने में , सजावटी चीजे बनाने में,  प्लाईवुड इंडस्ट्री में, अगरबत्ती उद्योग में, बल्ली के रूप में, चाली बनाने में, आइसक्रीम के चम्मच बनाने मे,  टूथपिक बनाने में, पेपर मिल उद्योग में,  एथनॉल उद्योग में, मैट बनाने में तथा और भी बहुत से उद्योगों में किया जाता है ।

बांस के एक पौधे से 20 से लेकर 200  बांस तक निकलते है, इस प्रकार यदि एक हजार बांस के पौधे भी लगा लिए जाये तो इनसे बड़ी आसानी से एक लाख तक बांस का उत्पादन किया जा सकता है , जिसमे हर बांस की लम्बाई लगभग 25 फ़ीट होती है। यदि 25 फ़ीट लम्बे बांस को कम से कम 10 रूपए के हिसाब से भी बेचा जाये तो इससे बड़ी आसानी से 10 लाख रूपए कमाए जा सकते है। 

एक बार बांस लगाने पर इससे 40 से 45 साल तक फसल ली जा सकती है। इसलिए बांस  लगाने पर हर साल मेहनत करने की भी जरुरत नहीं होती है। 

बांस की खेती से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी इंटरनेट और क्षेत्र के कृषि विज्ञानं केंद्र से प्राप्त की जा सकती है। 

स्टीविया की खेती / Stevia Farming

स्टीविया एक प्रकार का पौधा होता है, भारत में इसे मीठी तुलसी भी कहा जाता है, स्टीविया एक बहुत ही मीठा पौधा होता है, यह शक्कर से 20 गुना अधिक मीठा होता है। इसका उपयोग डायबिटीज के मरीजों के द्वारा किया जाता है। स्टीविया की पत्तियों को किसी भी खाने की चीज में शक्कर की जगह प्रयोग किया जा सकता है, तथा इससे शक्कर की तरह कोई नुक्सान नहीं होता है इसलिए डायबिटीज के मरीज भी इसका उपयोग बिना किसी परेशानी के कर सकते है।

स्टीविया का पौधा लगभग 2 फ़ीट तक ऊंचा होता है, इसकी पत्तियों को तोड़कर सुखा लिया जाता है और इन सुखी पत्तियों को बेचा जाता है। स्टीविया का पौधा एक बार लगाने पर इससे लगभग पांच साल तक फसल ली जा सकती है तथा हर 3 से 4 महीने में इसकी पत्तियाँ तोड़ने लायक हो जाती है। इस प्रकार एक बार इसकी फसल लगाने पर एक साल में 3-4  बार और पांच साल में लगभग 15-20 बार इसकी फसल ली जा सकती है। 

स्टीविया की खेती करने के लिए किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है वह कंपनी इसके पौधे भी उपलब्ध कराती है और इसकी पत्तियाँ भी खरीद लेती है। स्टीविया की सुखी पत्तियों को ये कम्पनियां 150 से 175 रूपए प्रति किलो के हिसाब से खरीद लेती है जिससे किसान को बहुत अच्छा फायदा हो जाता है।  एक एकड़ की स्टीविया की खेती से साल में 5 से 8 लाख रूपए तक कमाए जा सकतें है।

स्टीविया की खेती से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी इंटरनेट और क्षेत्र के कृषि विज्ञानं केंद्र से प्राप्त की जा सकती है।

वनीला की खेती / Vanilla Farming

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वनीला केसर के बाद दूसरी सबसे कीमती कीमती फसल होती है, एक किलो वनीला लगभग 40,000 रूपए की बिकती है। वनीला का उपयोग आइसक्रीम बनाने में फ्लेवर के रूप में किया जाता है। दुनियाभर में बहुत सारे फ्लेवर की आइसक्रीम बनाई जाती है परन्तु वनीला फ्लेवर की आइसक्रीम सबसे अधिक पसंद की जाती है। वनीला का उपयोग कोल्डड्रिंक, परफ्यूम और ब्युटी-प्रोडक्ट्स बनाने में भी किया जाता है।  इसलिए दुनियाभर में इसकी बहुत अधिक मांग/डिमांड है, इसलिए इसे बेचने में कभी कोई दिक्कत नहीं आती।

वनीला एक बेल पौधा होता है, इस पर लम्बी लम्बी फलियां लगती है। वनीला के पौधे लगाने के तीन साल बाद ये फसल देने लगते है, तथा इन पौधो से 12 से 14 साल तक फसल ली जा सकती है। फूल आने से लेकर फलियां पकने तक 9 से 10 महीनों का समय लगता है।

वनीला के पौधो को बीज से या बेल की कटिंग करके लगाया जा सकता है। वनीला के पौधों के लिए छायादार जगह और माध्यम तापमान की जरुरत होती है इसलिए इसे छायादार वृक्षों के निचे या कृतिम छाया करके लगाया जाता है। पेड़ों  से छनकर जो रौशनी आती  है वह वनीला के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है।

वनीला की खेती से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी इंटरनेट और क्षेत्र के कृषि विज्ञानं केंद्र से प्राप्त की जा सकती है।

स्ट्राबेरी की खेती / Strawberry Farming

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स्ट्राबेरी एक विदेशी फल है जिसे भारत में भी बहुत पसंद किया जाता है, इसकी खेती भारत में बहुत कम की जाती है जिसके कारण यह बाजार में बहुत कम मात्रा में उपलब्ध है इसलिए स्ट्राबेरी बहुत अधिक मूल्य पर बेचीं जाती है। तथा इसे बेचने में कोई दिक्कत नहीं होती है।

स्ट्रॉबेर्री के पौधे सितम्बर में लगाए जाते है, पौधे लगाने के 50 से 60 दिन बाद इसके फल लगने शुरू हो जाते है तथा ये फल मार्च माह तक आते रहते है।

स्ट्रॉबेर्री के पौधे की उचाई लगभग 8 से 10 इंच तक होती है। एक एकड़ के खेत में 25 से 30 हजार तक पौधे लगाए जा सकते है। एक पौधे से आधा से एक किलो तक स्ट्राबेरी प्राप्त की जा सकती है तथा स्ट्राबेरी को 125 से 150 रूपए प्रति किलो तक बड़ी आसानी से बेचा जा सकता है। इस प्रकार एक एकड़ के खेती से 15 से 20 लाख रूपए की बिक्री बड़ी आसानी से की जा सकती है।

स्ट्राबेरी के पौधे अलग अलग किस्मों के हिसाब से 1 रूपए से 10 रूपए तक मिलते है,  जिनकी उत्पादन क्षमता और फलो का साइज अलग अलग होती है।

स्ट्राबेरी की खेती से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी इंटरनेट और क्षेत्र के कृषि विज्ञानं केंद्र से प्राप्त की जा सकती है।


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