Tuesday, July 21, 2020

राम राजा मंदिर ओरछा Ram Raja Temple Orchha

राम राजा मंदिर ओरछा, Ram Raja Temple Orchha

श्री राम राजा मंदिर ओरछा
Shri Ram Raja Temple Orchha

ओरछा में स्तिथ श्री राम राजा मंदिर एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान् श्री राम की पूजा भगवान् के रूप में न होकर बल्कि एक राजा के रूप में की जाती है। इसलिए इस मंदिर को राम राजा मंदिर के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है की भगवान् श्री राम दिन के समय ओरछा में रहते है, और रात के समय अयोध्या में जाकर विश्राम करते है। 
The Rama Raja Temple at Orchha is the only temple where Lord Rama is worshiped not as a god but as a king. Hence this temple is known as Ram Raja Mandir. It is believed that Lord Rama lives in Orchha during the day, and rests in Ayodhya at night.

भगवान् श्री राम का यह मंदिर भारत में मध्यप्रदेश राज्य के निवाड़ी जिले के ओरछा नगर में स्थित है। यहां स्थित यह मंदिर रानी महल की रसोई के अंदर स्थापित है। इस मंदिर में भगवान् श्री राम की ओरछा के राजा की तरह पूजा की जाती है, और राम राजा को मध्यप्रदेश पुलिस के द्वारा दिन में पांच बार (सुबह सूर्योदय से पहले, दिन में तीन बार आरती के समय और शाम को सूर्यास्त के बाद ) गार्ड ऑफ़ ऑर्नर दिया जाता है। ओरछा में भगवान् श्री राम को गार्ड ऑफ़ ऑर्नर देने की यह परंपरा पिछले साढ़े चार सौ सालों से चली आ रही है। 
This temple of Lord Shri Ram is located in Orchha Nagar, Niwari district of Madhya Pradesh state in India. This temple located here is installed inside the kitchen of Rani Mahal. In this temple, Lord Sri Rama is worshiped like the king of Orchha, And Ram Raja is given the guard of honor by the Madhya Pradesh Police five times a day (before sunrise in the morning, three times a day at Aarti and after sunset in the evening). This tradition of giving guard of honor to Lord Rama in Orchha has been going on for the last four hundred fifty years.

ओरछा के लोग सदियों से खुद को राजा राम की प्रजा मानते हैं, ओरछा में कोई भी व्यक्ति राजा राम से बड़ा नहीं हो सकता इसलिए ओरछा में राम राजा के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को गार्ड ऑफ़ ऑनर नहीं दिया जाता। यहां तक की ओरछा में राज्य के मुख्यमंत्री, भारत के प्रधानमंत्री और भारत के राष्ट्रपति के आने पर उन्हें भी गार्ड और ऑनर नहीं दिया जाता, क्योकि जनभावना के अनुसार ओरछा में केवल राजा राम का ही राज चलता है, और उनके अलावा ओरछा में यह सम्मान किसी अन्य को प्राप्त नहीं है। इसलिए प्रशाशन के द्वारा भी इस परंपरा को बचाये रखने में हमेशा पूरा सहयोग किया जाता है।
The people of Orchha consider themselves public of King Rama for centuries, No person in Orchha can be greater than Ram Raja, Therefore, there is no guard of honor given to anyone other than Ram Raja in Orchha. Even the Chief Minister of state, Prime Minister of India and President of India are not given guard of honor in Orchha, because according to public sentiment, only Raja Ram rule in Orchha, and apart from him, no other person can receive this honor in Orchha. Therefore, full support is always given to preserve this tradition through administration.

राम राजा मंदिर में भगवान् श्री राम अपने पुरे दरबार के साथ विराजते है, यहां राम राजा के साथ देवी सीता, लक्ष्मण जी, हनुमान जी, जामवंत जी, सुग्रीव जी और अन्य मूर्तियाँ भी स्थित हैं। ओरछा में किसी भी काम की शुरुआत राम राजा से आज्ञा लेकर ही की जाती है। ओरछा में किसी शुभ कार्य और शादी के अवसर पर सबसे पहला निमंत्रण पत्र राजा राम को ही दिया जाता है। यहां सभी भक्त अपनी समस्या लेकर राम राजा के मंदिर ही जाते है और भक्तो के अनुसार उन्हें समाधान भी प्राप्त होते है।
Lord Rama sits in the Ram Raja temple with his entire court, Goddess Sita, Laxman ji, Hanuman ji, Jamwant ji, Sugriv ji and other idols are also located here along with Ram Raja. Any work in Orchha is started by taking orders from Ram Raja. Here all the devotees take their problems to the temple of Ram Raja and according to the devotees they also get the solution.

राम राजा मंदिर की कहानी, Story of Ram Raja Temple

प्राचीन कथा के अनुसार महाराज मधुकर शाह (जिन्होंने ओरछा और टीकमगढ़ पर 1554 से 1592  तक शासन किया था) एक कृष्णा भक्त थे, तथा उनकी पत्नी महारानी कुँवरि गणेश एक राम भक्त थी। एक दिन महाराज मधुकर शाह ने अपनी पत्नी कुँवरि गणेश से भगवान् कृष्ण के दर्शन करने के लिए वृंदावन चलने को कहा, महारानी राम भक्त थी इसलिए उन्होंने वृंदावन जाने से मना कर दिया। इस बात पर मधुकर शाह नाराज हो गए और उन्होंने कहा की यदि तुम इतनी बड़ी राम भक्त हो तो अपने राम को यहाँ ओरछा क्यों नहीं ले आती। यह सुन कर महारानी प्रण लेती है के वह अयोध्या जायेगीं और भगवान् श्री राम को साथ में लेकर ही लौटेंगीं।
According to ancient legend, King Madhukar Shah (Who ruled Orchha and Tikamgarh from 1554 to 1592) was a Krishna devotee, and his wife Queen Kunwari Ganesha was a Ram devotee. One day king Madhukar Shah asked his wife Kunwari Ganesh to walk to Vrindavan to see Lord Krishna, Queen was a devotee of Lord Rama, so she refused to go to Vrindavan. Madhukar Shah got angry on this and said that if you are such a big Ram devotee then why don't you bring your Rama to here Orchha. Hearing this, the Queen takes a vow that she will go to Ayodhya and return with Lord Rama.

अयोध्या पहुंचकर महारानी ने सरयू नदी के किनारे अपनी कुटिया बनाकर भगवान् श्री राम को प्रसन्न करने के लिए तपस्या आरम्भ की। महारानी ने कई महीनों तक सरयू के किनारे घोर तपस्या की। कई महीनों की तपस्या के बाद भी जब भगवान् श्री राम ने दर्शन नहीं दिए तो निराश होकर महारानी ने आत्महत्या करने के लिए सरयू नदी में छलांग लगा दी। नदी के जल के अंदर ही भगवान् श्री राम ने महारानी को दर्शन दिए और उनकी जान बचाई।
On reaching Ayodhya, the queen started her penance by making her hut on the bank of river Saryu to please Lord Rama. The queen practiced severe penance on the banks of Sarayu for several months. Even after many months of hard penance, when Lord Sri Rama did not appear, the queen, frustrated, jumped into the Saryu river to commit suicide. Lord Rama appeared to the queen inside the river water and saved her life.

महारानी ने भगवान् श्री राम से ओरछा चलने की विनती की। भगवान् श्री राम ने महारानी के आग्रह पर ओरछा आना स्वीकार कर लिया और महारानी को अपनी मूर्तियाँ प्रदान की, साथ ही भगवान् श्री राम ने तीन शर्त भी रखी। पहली शर्त यह थी की अयोध्या से ओरछा की यात्रा केवल पुष्य नक्षत्र में और पैदल की जाएगी, दूसरी शर्त थी की मूर्ति एक बार जहाँ रख दी जायगी वहां से फिर दुबारा नहीं हिलाई जा सकेगी, तीसरी और अंतिम शर्त थी की जहाँ भी मेरी स्थापना की जाएगी उस नगर में केवल मेरा ही राज रहेगा उस जगह किसी अन्य का राज नहीं चलेगा। महारानी ने भगवान् श्री राम की तीनो शर्ते मान ली और उनसे ओरछा आने का निवेदन किया।
The queen pleaded with Lord Rama to come to Orchha. Lord Rama agreed to come to Orchha on the request of the queen and gave his idols to the queen, along with Lord Rama also placed three conditions. The first condition was that the journey from Ayodhya to Orchha would be done only during Pushya Nakshatra and on foot, The second condition was that once the idol is kept, it cannot be moved again from there, The third and final condition was that wherever I will be established, only my rule will remain in that city, no other kingdom will prevail in that place. The queen accepted the three conditions of Lord Rama and requested him to come to Orchha.

इसके बाद महारानी कुँवरि गणेश ने ओरछा में महाराज मधुकर शाह को संदेश भेजा, की वह भगवान् श्री राम को लेकर अयोध्या लौट रही हैं। यह सन्देश प्राप्त करने के बाद महाराजा ने ओरछा में भगवान् श्री राम की मूर्तियों की स्थापना करने के लिए एक भव्य चतुर्भुज मंदिर का निर्माण शुरू करवा दिया। महारानी कुँवरि गणेश ने श्री राम मूर्ति को लेकर  संतो और स्त्रियों के साथ पुष्य नक्षत्र में यात्रा शुरू की। महारानी केवल पुष्य नक्षत्र के समय ही यात्रा करती थी, इसलिए अयोध्या से ओरछा तक की लगभग साढ़े चार सौ किलोमीटर की दुरी तय करने में महारानी को 8 माह और 27 दिन का समय लगा। राम राजा मंदिर में लगे शिलालेख के अनुसार महारानी कुँवरि गणेश 1575 में श्री राम की मूर्ति लेकर ओरछा पहुंची थी।
After this, Queen Kunwari Ganesh sent a message to King Madhukar Shah in Orchha, that she is returning to Ayodhya with Lord Shri Ram. After receiving this message, the king started construction of a grand chaturbhuj temple to install the idols of Lord Rama in Orchha. Queen Kunwari Ganesha started the yatra with saints and women in Pushya Nakshatra with Lord Rama idol. The queen traveled only during Pushya Nakshatra, so it took the queen 8 months and 27 days to cover the distance of about four hundred and fifty kilometers from Ayodhya to Orchha. According to the inscription in the Ram Raja temple, Queen Kunwari Ganesh reached Orchha in 1575 carrying the idols of Lord Rama.

महारानी के ओरछा पहुंचने तक महाराजा मधुकर शाह द्वारा बनवाये जा रहे मंदिर का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ था, इसलिए महारानी ने भगवान् श्री राम की मूर्ति को अपने महल की रसोई में विराजमान कर दिया ताकि वह रोज अधिक से अधिक समय तक भगवन श्री राम के दर्शन कर सके। कुछ समय बाद महाराजा द्वारा बनवाये जा रहे चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो गया । जब मूर्ति को महल से मंदिर में स्थापित करने के लिए मूर्ति को उठाया गया, तो बहुत प्रयास करने के बाद भी मूर्ति को अपने स्थान से हिलाया नहीं जा सका। इसे भगवान्  श्री राम चमत्कार मानते हुए मूर्ति को उसी स्थान पर रहने दिया गया और महल को ही मंदिर के रूप में बदल दिया गया।
The construction of the temple being built by King Madhukar Shah was not completed until the queen reached Orchha, Therefore, the queen placed the idol of Lord Shri Rama in the kitchen of her palace so that she could see Lord Rama for the maximum time daily. After some time the construction work of the Chaturbhuj temple being built by the king was completed. When the idol was raised from the palace to be installed in the temple, the idol could not be moved from its place even after much effort. Assuming it to be a miracle of Lord Sri Rama, the idol was allowed to remain in the same place and the palace itself was converted into a temple.

जिस दिन ओरछा के महल में राम राजा की मूर्ति ने अपनी जगह से हिलने से इंकार कर दिया था, उस दिन के बाद महाराजा मधुकरशाह ने अपने ओरछा के राज को श्री राम को सौंप दिया, और ओरछा के किले को छोड़ कर अपनी राजधानी टीकमगढ़ ले गए। उसी दिन से भगवान् श्री राम ओरछा के राजा है, और राम राजा कहलातें हैं।
The day the idol of Ram Raja refused to move from his place in the palace of Orchha, After that day King Madhukarshah handed over the kingdom of Orchha to Lord Rama and left the fort of Orchha and took his capital to Tikamgarh. Since that day Lord Rama is the king of Orchha, and Rama is called the RamRaja. 


आस पास के दर्शनीय स्थल, Places to see nearby

ओरछा का राम राजा मंदिर भगवान् श्री राम, देवी सीता और लक्ष्मण जी की मूल प्रतिमाओं के लिए पुरे भारत में एक विशेष स्थान रखता है। यहाँ राम नवमी और अन्य त्यौहार बड़े धूम धाम से मनाये जाते है। इस मंदिर में हर साल लाखों श्रदालु राम राजा के दर्शन करने आते है। राम राजा का यह महल बुंदेला स्थापत्य कला का अदभुत नमूना है,  पूरा ओरछा नगर इसी महल के आसपास बसा हुआ है। इस मंदिर के पास में भव्य चतुर्भुज मंदिर भी बना हुआ है जिसमे भगवान् श्री राम की मूर्ति स्थापित होनी थी, परन्तु मूर्ति स्थापित ना होने के कारण यह भव्य मंदिर आज भी वीरान पड़ा है। 
The Ram Raja temple of Orchha holds a special place in the whole of India for the original idols of Lord Shri Ram, Goddess Sita and Lakshman ji. Ram Navami and other festivals are celebrated with great pomp in the Ram Raja temple. Every year millions of devotees visit this temple to see the Ram Raja. This palace of Ram Raja is a unique example of Bundela architecture, the whole of Orchha city is situated around this palace. A grand Chaturbhuj Temple is also built near this temple, in which the idol of Lord Shri Ram was to be installed, but due to the non-installation of the idol, this grand temple is still deserted.

चतुर्भुज मंदिर ओरछा
Chaturbhuj Temple Orchha

ओरछा में राम राजा मंदिर के चारो तरफ सुरक्षा चक्र के रूप में हनुमान जी के कई मंदिर बने हुए है।  इनके अलावा ओरछा में लक्ष्मी नारायण मंदिर, पंचमुखी महादेव मंदिर, चतुर्भुज मंदिर, हरदौल की बैठक, जहांगीर महल, राय प्रवीण महल और बेतवा नदी के तट पर बनी छतरियाँ आदि प्रमुख दर्शनीय स्थल है। जिन्हें देखने देश और विदेश से लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष आते है।
Many temples of Hanuman ji are built as security circle around the Ram Raja temple in Orchha. Apart from these, Lakshmi Narayan Temple, Panchmukhi Mahadev Temple, Chaturbhuj Temple, Hardaul Ki Baithak, Jahangir Mahal, Rai Praveen Mahal and Chhatris built on the banks of Betwa River are the major sights in Orchha. Which are visited by millions of tourists from the country and abroad.

ओरछा कैसे पहुंचे How to reach Orchha

ओरछा सड़क मार्ग द्वारा झाँसी, ग्वालियर और खजुराहो जैसे स्थानों से बहुत अच्छी तरह जुड़ा हुआ है यहां से ओरछा पहुंचने के लिए बस या टैक्सी किराये पर ली जा सकती है। ओरछा से सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन झांसी रेलवे स्टेशन है जिसकी दुरी 16 किलोमीटर है। इनके अलावा ओरछा से सबसे निकटतम एयरपोर्ट ग्वालियर एयरपोर्ट है जो ओरछा से लगभग 113 किलोमीटर दुरी पर स्थित है तथा खजुराहो एयरपोर्ट की दुरी ओरछा से लगभग 155 किलोमीटर है।
Orchha is very well connected by road to places like Jhansi, Gwalior and Khajuraho, from here a bus or taxi can be hired to reach Orchha. The nearest railway station from Orchha is Jhansi railway station which is 16 kilometers away. Apart from these, the nearest airport from Orchha is Gwalior Airport, which is located about 113 km away from Orchha, and Khajuraho Airport is about 155 kilometers from Orchha.

इतिहासकारों का मत The opinion of historians

इतिहासकारों के अनुसार 1528 में अयोध्या में बाबर द्वारा राम मंदिर का विध्वंश करने के पहले, मंदिर की मूल मूर्तियां पुजारियों ने सरयू नदी में छिपा दी थी। इसलिए ओरछा में राम राजा मंदिर में स्थापित मूर्तियाँ अयोध्या के राम मंदिर की मूल मूर्तियाँ हो सकती हैं।
According to historians, before Babur destroyed the Ram temple in Ayodhya in 1528, the original idols of the temple were hidden by priests in the Saryu River. Therefore the idols installed in the Ram Raja temple in Orchha may be the original idols of the Ram temple of Ayodhya.

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