Wednesday, July 29, 2020

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर Sree Padmanabhaswamy Temple

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का महत्त्व, स्थापत्य और इतिहास/ Importance, Architecture and History of Sree Padmanabhaswamy Temple

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत के केरल राज्य के तिरुअनंतपुरम शहर में स्थित भगवान विष्णु का एक विश्व प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है। यह मंदिर भारत के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान् विष्णु को समर्पित है, इस मंदिर में भगवान् विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान है। भगवान् विष्णु की यह मूर्ति बहुत ही विशाल और देखने में अत्यंत सुन्दर है। इस मंदिर में भगवान् विष्णु के दर्शन करने के लिए देश और विदेश से प्रतिदिन हजारों भक्त आतें हैं। इस मंदिर की अकूत सम्पदा के कारण यह मंदिर दुनिया का सबसे धनवान मंदिर माना जाता है।
Sree Padmanabhaswamy Temple is a world famous Hindu temple of Lord Vishnu located in the city of Thiruvananthapuram in the state of Kerala, India. This temple is one of the most prominent temples in India. This temple is dedicated to Lord Vishnu, Lord Vishnu is seated in a sleeping posture on Sheshnag in this temple. This idol of Lord Vishnu is very huge and very beautiful to see. There are thousands of devotees visiting the temple every day from across the country and abroad to see Lord Vishnu. Due to the immense wealth of this temple, this temple is considered to be the richest temple in the world.

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का महत्त्व Importance of Sri Padmanabhaswamy Temple

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के बारे में कहा जाता है की इसका निर्माण 5000 वर्ष पूर्व कलयुग के प्रथम दिन किया गया था। इस मंदिर में स्तिथ भगवान विष्णु की 18 फुट की विशाल प्रतिमा 12000 से अधिक श्रीशालिग्राम पत्थरों को कटुसरकार नामक जड़ी-बूटियों के मिश्रण से जोड़कर बनाई गयी है।
It is said about the Sri Padmanabhaswamy temple that it was constructed on the first day of Kali Yuga 5000 years ago. In this temple, a huge 18-foot statue of Lord Vishnu has been made by connecting more than 12000 Sri Saligram stones with a mixture of herbs called katusarakara.

इस मंदिर में सभी त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते है और इनके अलावा दो मुख्य वार्षिक उत्सव भी मनाये जाते है,  जिनका नाम पइनकुनि उत्सव और अल्पसि उत्सव हैं। इन वार्षिक उत्सवों में भाग लेने के लिए लाखो की संख्या में श्रद्धालु आतें है, और श्री पद्मनाभस्वामी से सुख-समृद्धि की मंगल कामनाएँ करते हैं। 
All the festivals in this temple are celebrated with great pomp and apart from these, two main annual festivals are also celebrated, namely the Painkuni festival and the Alpashi Utsavam. Lakhs of devotees visit these annual festival, and pray to Lord Vishnu for happiness and prosperity.

पइनकुनि उत्सव Painkuni Festival

पइनकुनि उत्सव श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में मार्च-अप्रैल महीने में मनाया जाने वाला एक मुख्य वार्षिक उत्सव है। यह उत्सव 10 दिनों तक मनाया जाता है, इस उत्सव के दौरान प्रत्येक दिन एक अलग विशेष अनुष्ठान किया जाता है। इस त्यौहार के नौवें दिन के अनुष्ठान में त्रावणकोर के शाही परिवार के मुखिया शामिल होतें है। इस उत्सव के दसवें दिन देव प्रतिमाओं के साथ शोभा यात्रा निकली जाती है, जिसमे त्रावणकोर के राजा और शाही परिवार के सभी पुरुष सदस्य शामिल होते है।
The Painkuni Festival is a main annual festival celebrated in the month of March-April at Sri Padmanabhaswamy Temple. This festival is celebrated for 10 days, during this festival a different special ritual is performed every day. The rituals on the ninth day of this festival include the head of the royal family of Travancore. On the tenth day of this festival, the Shobha Yatra is carried out with the holy idols, which include the king of Travancore and all male members of the royal family.

अल्पसि उत्सव Alpashi Utsavam

अल्पसि उत्सव श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर मेंअक्टूबर-नवंबर महीने में मनाया जाने वाला एक मुख्य वार्षिक उत्सव है। इस उत्सव में देवताओं के लिए समुद्र में पवित्र स्नान किया जाता है। मंदिर से एक विशाल जुलूस शुरू होता है जो शंगुमुगम तट तक जाता है, इस जुलूस की अगुआई त्रावणकोर के शाही परिवार के सबसे प्रमुख व्यक्ति करते है। इस जुलूस में त्रावणकोर के शाही परिवार के साथ कई हाथी, घुड़सवार, सशस्त्र पुलिस और हजारों श्रद्धालु चलते है। इस भव्य और ऐतिहासिक जुलूस का गवाह बनने के लिए लाखों लोग सड़कों पर निकलते है।
The Alpasi Utsav is a main annual festival celebrated in the month of October-November at the Sri Padmanabhaswamy Temple. In this festival, a holy bath is taken in the sea for the gods. A huge procession begins from the temple leading to the Shanmugam coast, the procession being led by the most prominent of the royal family of Travancore. In this procession, many elephants, horsemen, armed police and thousands of devotees walk with the royal family of Travancore. Millions of people take to the streets to witness this grand and historical procession.

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में केवल हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग ही प्रवेश कर सकते हैं। इस मंदिर में प्रवेश करने के लिए पुरषों के लिए धोती और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है।
Only those who believe in Hinduism can enter Shri Padmanabhaswamy Temple. To enter this temple, it is mandatory for men to wear dhoti and women to wear saree.

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का स्थापत्य Architecture of Sri Padmanabhaswamy Temple

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर बहुत ही विशाल परिसर में फैला हुआ है, इस मंदिर के निर्माण शैली में द्रविड़ और दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का मिला जुला असर देखने को मिलता है।
The Sri Padmanabhaswamy Temple is spread over a very large complex, the mixed style of Dravidian and South Indian architecture is seen in the construction style of this temple.

श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के गर्भगृह (जिसे अनंतशयनम कहा जाता है) के अंदर भगवन विष्णु की विशाल प्रतिमा स्थित है। अनंतशयनम में भगवान विष्णु के दर्शन करने के लिए तीन द्वार है। पहले द्वार से भगवान विष्णु के सिर और हाथ के दर्शन होते है, मध्य द्वार से उदर और नाभि क्षेत्र के दर्शन होते है और तीसरे द्वार से पैरो के दर्शन होते है।
A huge statue of Lord Vishnu is located inside the sanctum sanctorum (called Ananthasayanam) of Sri Padmanabhaswamy Temple. Ananthasayanam has three doors to see Lord Vishnu. The first gate has visions of Lord Vishnu's head and hands, the middle gate has visions of the abdomen and navel region, and the third door has visions of feet.

गर्भगृह के सामने एक मंच बनाया गया इस मंच का निर्माण ग्रेनाइट पत्थर की एक ही शिला से किया गया है। इस मंच को ओटटक्कल मंडप कहा जाता है, इसका उपयोग देवता को अभिषेक कराने के लिए किया जाता है। इस मंच के पत्थरों से बने हुए खम्बों को सोने से मढ़ा गया है।
A platform built in front of the sanctum sanctorum is constructed from a single stone of granite. This platform is called the Ottatakkal Mandap, it is used to abhishekam the deity. The pillars made of stones of this platform are overlaid with gold.

मंदिर परिसर में ही श्री कृष्णास्वामी मंदिर भी स्थित है, इनके अलावा मंदिर परिसर में विभन्न स्थानों पर पत्थरों के द्वारा 11 मंडप बनाए गए है, जिनका प्रयोग अलग-अलग धार्मिक कार्यो के लिए किया जाता है।
Sri Krishnaswamy Temple is also situated in the temple premises, besides these 11 pavilions have been built by stones at various places in the temple premises, which are used for different religious purposes.

मंदिर परिसर में एक आयताकार गलियारा है जिसे श्रीबलीपपुराम कहा जाता है, इस गलियारे को सहारा देने के लिए 365 और 1/4 खम्बे बनाए गए है।
The temple complex has a rectangular corridor called Sribalipapuram, 365 and 1/4 pillars have been built to support this corridor.

 मंदिर के पूर्वी गलियारे के निकट एक ध्वजा स्थंभ है इसकी उचाई लगभग 80 फ़ीट है, इस स्थंभ को सागवान की लकड़ी से बनाया गया है जिसे पूरी तरह से स्वर्ण से मढ़ा गया है। इस स्थंभ के शीर्ष पर भगवान विष्णु के वाहन पक्षीराज गरुड़ की कलाकृति बनाई गयी है।
There is a flagstone near the eastern corridor of the temple, its height is about 80 feet, this pillar is made of teak wood which is completely overlaid with gold. On the top of this pillar is the artwork of Lord Vishnu's vehicle Garuda.

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के गर्भगृह के पूर्व में गोपुरम स्थित है, यह सात मंजिलों में बना हुआ है। जिसकी उचाई लगभग 35 मीटर है। गोपुरम के शिखर पर 7 स्वर्ण कलश बनाये गए हैं, गोपुरम पर भगवान विष्णु के 10 अवतार उकेरे गए है, इसके अलावा पुरे  गोपुरम को विभिन्न कलाकृतियों से सुसज्जित किया गया है।
Gopuram is situated to the east of the sanctum sanctorum of Sri Padmanabhaswamy Temple, it is built in seven floors. The height of which is about 35 meters. 7 gold urns have been carved on the summit of Gopuram, 10 incarnations of Lord Vishnu have been carved on Gopuram, besides the entire Gopuram has been decorated with various artifacts.

मंदिर में प्रवेश करने के लिए दो मुख्य द्वार है जिन्हे पूर्वी द्वार और पश्चिमी कहा जाता है।
There are two main gates to enter the Sri Padmanabhaswamy temple which are called the eastern gate and the western one.

मंदिर परिसर के उतर-पूर्व हिस्से में एक विशाल पवित्र सरोवर स्थित है जिसे पद्मतीर्थम सरोवर कहा जाता है। पद्मतीर्थम सरोवर केरल राज्य और भारत के कुछ सबसे पवित्र जलाशयों में से एक है।
In the northeast part of the temple complex there is a huge holy lake called Padmathirtham lake. Padmatirtham lake is one of the most sacred reservoirs in the state of Kerala and India.

पुरे मंदिर परिसर में बहुत ही बारीक़ और सुन्दर नक्काशी की गयी है, पत्थरों में ऐसी कलाकृतियाँ उकेरी गयी है जो देखने में जीवंत प्रतीत होती है। इसके अलावा मंदिर में कई जगह भित्ति चित्र बनाये गए है जो देखने में अत्यंत सुन्दर प्रतीत होतें हैं।
The entire temple complex has very fine and beautiful carvings, such artifacts are carved in the stones which seems to be alive in view. Apart from this, murals have been made in many places in the temple which seem very beautiful to see.

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास History of Sri Padmanabhaswamy Temple

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का सर्वप्रथम निर्माण किसने और कब करवाया इसका कोई ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, परन्तु प्राचीन समय से ही यह किंवदंती चली आ रही है की श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की स्थापना 5000 वर्ष से भी अधिक पहले कलियुग के प्रथम दिन की गयी थी।
There is no historical documents of who and when the first construction of Shri Padmanabhaswamy Temple was made, But it has been a legend since ancient times that the Sri Padmanabhaswamy Temple was established more than 5000 years ago on the first day of Kali Yuga.

एक और किंवदंती के अनुसार कलयुग की शुरुआत के 950 साल बाद एक तुलु ब्राह्मण भक्त मुनि दिवाकर ने श्री पद्मनाभस्वामी जी की मूर्ति को फिर से स्थापित किया और मंदिर को दिव्यता प्रदान की।
According to another legend, 950 years after the beginning of Kali-yuga, Muni Diwakar, a Tulu Brahmin devotee, reinstated the idol of Sri Padmanabhaswamy Ji and granted divinity to the temple.

ऐतहासिक दस्तावेजों में श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का सर्वप्रथम उल्लेख 9वीं शताब्दी में मिलता है। 9वीं शताब्दी के महान तमिल संत और कवी नम्मालवार ने अपनी रचनाओं में बताया है की उनके समय में श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर और पूरा शहर अकल्पनीय रूप से समृद्ध थे। मंदिर की सभी दीवारें शुद्ध सोने से बनाई गयी थी, पुरे शहर में स्वर्ण का भरपूर प्रयोग किया गया था। मंदिर के साथ पूरा शहर स्वर्ग के सामान प्रतीत होता था।
The first mention of Sri Padmanabhaswamy Temple in the historical documents is found in the 9th century. The great 9th century Tamil saint and poet Kammal Nammalvar in his compositions have stated that the Sri Padmanabhaswamy Temple and the entire city were unimaginably prosperous in his time. All the walls of the temple were made of pure gold, gold was used extensively throughout the city. The entire city, along with the temple, seemed like a paradise.

1459 में श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की छत का पुनर्निर्माण करने के लिए मूर्ति को स्थानांतरित किया गया था। 1461 में गर्भगृह के सामने ओट्टकल मंडप बनाया गया था जिसका निर्माण ग्रेनाइट की एक विशाल शिला से किया गया था।
The statue was relocated in 1459 to renovate the roof of the Sri Padmanabhaswamy Temple. In 1461, the Ottakkal pavilion was built in front of the sanctum sanctorum which was constructed with a huge rock of granite.

मंदिर के वर्तमान स्वरुप का पुनर्निर्माण निर्माण 1733 में त्रावणकोर के राजा मार्तण्ड वर्मा द्वारा किया गया था। 1739 में राजा मार्तण्ड वर्मा के संरक्षण में 12000 से अधिक श्रीसालिग्राम पत्थरों को कटुसरकार नामक जड़ी बूटियों के मिश्रण से जोड़कर नयी मूर्ति बनाई गयी।
The present form of the temple was reconstructed in 1733 by King Marthand Varma of Travancore. In 1739, under the patronage of King Martand Verma, a new statue of Sri Padmanabhaswamy was made by combining more than 12000 Srisaligram stones with a mixture of herbs called katusarakara.

1750 में राजा मार्तण्ड वर्मा ने स्वयं को श्री पद्मनाभस्वामी का दास घोषित किया और अपने साम्राज्य को श्री पद्मनाभ का प्रतिक माना। उसके बाद से ही त्रावणकोर के राजाओ को श्री पद्मनाभदास कहा जाने लगा जिसका अर्थ भगवन विष्णु के सेवक होता है। त्रावणकोर राज्य की मान्यताओं को पंडरवका (जिसका अर्थ देव स्थान से सम्बंधित) कहा जाने लगा, और राज्य के कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन को पद्मनाभनते पनाम कहा जाने लगा जिसका अर्थ 'स्वामी द्वारा दिया गया धन' होता है।
In 1750, King Marthanda Varma declared himself a servant of Sri Padmanabhaswamy and considered his empire to be a symbol of Shri Padmanabha. From then on, the kings of Travancore came to be called Shri Padmanabhadas, which means the servant of Lord Vishnu. The beliefs of the state of Travancore came to be called Pandaravaka (meaning related to the place of devas), and salaries paid to the employees of the state came to be called Padmanabhanate Panam which means 'wealth given by the owner'.

2011 में कोर्ट के आदेश पर श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के कुछ तहखाने खोले गए थे, उन तहखानों से अनगिनत सोने की वस्तुएं, कीमती आभूषण, और अनगिनत रत्न प्राप्त हुए थे। उस समय तहखानों प्राप्त केवल स्वर्ण का मुल्य ही 22 अरब डॉलर आँका गया था। इस मंदिर का एक विशेष तहखाना अभी भी खोला जाना बाकी है, ऐसा माना जाता है की उस तहखाने के अंदर बाकी सभी तहखानों से प्राप्त कुल धन से भी कई गुना अधिक धन मौजूद है।
In 2011, some cellars of the Sri Padmanabhaswamy Temple were opened on a court order, Countless gold objects, precious jewelery, and countless gems were obtained from those cellars. At that time only the value of gold received from the cellars was estimated at $ 22 billion. A special cellar of this temple is still to be opened, it is believed that inside that cellar there is many times more money than the total money received from all the other cellars.

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का नियंत्रण हमेशा से ही त्रावणकोर साम्राज्य के राजाओं के पास रहा है और भारत की आजादी के बाद भी इस मंदिर के देखरेख त्रावणकोर साम्राजय के वंशज करते हैं।
The control of Sri Padmanabhaswamy Temple has always been with the kings of the Travancore Empire and even after the independence of India, this temple is looked after by the descendants of the Travancore Empire.

यह भी पढ़ें Also Read

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला Supreme Court verdict on Sree  Padmanabhaswamy Temple

No comments:

Post a Comment