Saturday, August 29, 2020

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर Brahma Temple Pushkar

 Brahma Temple, Pushkar ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर

ब्रह्मा मंदिर और पुष्कर झील

हिन्दुधर्म में ब्रह्मा, विष्णु, महेश (शिव) तीन प्रमुख देवता माने जाते है। ब्रह्मा जी को इस सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण करने वाले देवता माना जाता है, जबकि भगवान विष्णु को इस सृष्टि का पालनहार कहा जाता है और भगवान् शिव को इस सृष्टि का संहारकर्ता कहा जाता है। भगवान विष्णु और भगवान् शिव के पूरी दुनिया में अनगिनत मंदिर मौजूद है परन्तु ब्रह्मा जी का पुरे विश्व में केवल एक ही मंदिर है जो भारत के राजस्थान राज्य के अजमेर जिले के पुष्कर तीर्थ में स्थित है। ब्रह्मा जी को उनकी पत्नी सावित्री ने श्राप दिया दिया था जिसके कारण पुष्कर के अतिरिक्त अन्य किसी भी स्थान पर ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाती है।  

In Hinduism, Brahma, Vishnu, Mahesh (Shiva) are considered the three main deities. Lord Brahma is considered to be the God who created this entire universe. Whereas Lord Vishnu is said to be the caregiver of this creation and Lord Shiva is called the destroyer of this creation. There are countless temples of Lord Vishnu and Lord Shiva all over the world, but there is only one temple of Lord Brahma in the whole world which is located in Pushkar Tirth in Ajmer district of Rajasthan state, India. Lord Brahma was cursed by his wife Savitri due to which lord Brahma is not worshiped at any place other than Pushkar.


ब्रह्मा मंदिर की पौराणिक कहानी Mythological story of Brahma Temple

पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी ने सृस्टि का निर्माण करने के लिए एक यज्ञ का आयोजन किया था। जिस स्थान पर ब्रह्मा जी ने यज्ञ का आयोजन किया था उस स्थान पर उन्होंने जल प्राप्त करने के लिए एक पवित्र सरोवर का निर्माण किया। उस सरोवर का नाम पुष्कर रखा गया और जिस जगह पर यज्ञ का आयोजन किया गया था उस स्थान को पुष्कर तीर्थ  कहा जाने लगा। सभी तीर्थो में सर्वप्रथम पुष्कर तीर्थ का निर्माण किया गया था इसलिए पुष्कर तीर्थ को तीर्थराज भी कहा जाता है। पुष्कर को हिन्दुधर्म में सबसे प्रमुख तीर्थो  में से एक माना जाता है। 

According to the Puranas, Lord Brahma organized a Yagya to build the creation. At the place where Lord Brahma performed the yagya, he built a holy lake to get water. The lake was named Pushkar and the place where the yagya was performed came to be called Pushkar Tirtha. In all the pilgrimages Pushkar Teertha was first built, hence Pushkar Teertha is also called Teertharaj. Pushkar is considered one of the most prominent pilgrimages in Hinduism. 

 

 यज्ञ के आयोजन में सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया था। यज्ञ में ब्रह्मा जी को अपनी पत्नी के साथ बैठना आवश्यक था। यज्ञ में सभी देवी देवता समय पर पहुंच गए परन्तु ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री को वहां पहुंचने में बहुत देर हो गयी। यज्ञ का शुभ मुहुर्त निकलने लगा परन्तु ब्रह्मा जी की पत्नी सावित्री समय पर नहीं पहुंची, बहुत अधिक समय व्यतीत होने पर ब्रह्मा जी ने नंदनी गाय के मुख से गायत्री देवी को प्रकट किया और उनसे विवाह करके अपने यज्ञ को पूरा किया। 

All the deities were invited to perform the yagya. In the Yagya, lord Brahma was required to sit with his wife. All the gods and goddesses arrived on time in the Yagya but it was too late for Savitri, the consort of Brahma, to reach there. The auspicious time of Yagya started coming out but Savitri, wife of Lord Brahma did not reach on time, after spending too much time, Lord Brahma revealed Gayatri Devi through the mouth of Nandni cow and married her and completed his Yagya. 

 

जब सावित्री देवी यज्ञस्थल पर पहुंची, तब वह यज्ञ में ब्रह्मा जी के पास गायत्री देवी को देखकर अत्यंत क्रोधित हो गयी और उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया की कभी भी किसी भी स्थान पर ब्रह्मा जी की पूजा नहीं की जाएगी। ब्रह्मा जी को श्राप देने पर भी सावित्री देवी का क्रोध शांत नहीं हुआ और उन्होंने नंदनी गाय को भी कलयुग में गन्दगी खाने का श्राप दे दिया। 

When Savitri Devi reached the place of yagya, she became very angry to see Gayatri Devi near Lord Brahma in the Yagya. And she cursed Lord Brahma that Lord Brahma will never be worshiped at any place. Even when cursing Lord Brahma, Savitri Devi's anger did not calm down and she cursed Nandani cow to eat dirty in Kali Yuga. 

 

कुछ देर बाद जब सावित्री देवी का क्रोध शांत हुआ तब उन्होंने अपने श्राप  संशोधन करते हुए कहा की ब्रह्माजी की पूजा केवल पुष्कर में होगी अन्य किसी स्थान पर नहीं। ऐसा कहकर सावित्री देवी यज्ञस्थल से कुछ ही दूर एक पहाड़ी पर तपस्या करने चली गयी। इसलिए आज भी पुरे विश्व में ब्रह्माजी का केवल एक ही मंदिर है जो पुष्कर स्थित है और पुष्कर में ही सरोवर से कुछ ही दुरी पर एक छोटी पहाड़ी पर सावित्री देवी का भी मंदिर है। पुष्कर में  ब्रह्माजी की जितनी मान्यता है उतनी सावित्री देवी के भी है। सावित्री देवी को सौभाग्य की देवी माना जाता है इसलिए सावित्री देवी मंदिर में महिलाये विशेष पूजा करती है। महिलाएं सावित्री देवी को मेहंदी, बिंदी, चूड़ियाँ और प्रसाद चढाती है और सावित्री देवी से सौभाग्य तथा अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती है। 

After some time, when Savitri Devi's anger subsided, she amended her curse and said that Brahmaji would be worshiped only in Pushkar and not in any other place. Saying this, Savitri Devi went to do penance on a hill, a little away from the place of yagya. Therefore even today there is only one temple of Brahma in the whole world which is located in Pushkar and in Pushkar itself there is also a temple of Savitri Devi on a small hill some distance from Pushkar lake. The recognition of Savitri Devi  in Pushkar is as much as that of Lord Brahma. Savitri Devi is considered as the goddess of good fortune, so women do special worship in the Savitri Devi temple. The women offer Mehndi, Bindi, Bangles and Prasad to Savitri Devi and wish good luck and her husband's long life from Savitri Devi. 

 

ब्रह्मा मंदिर का इतिहास  History of Brahma Temple

ब्रह्मा मंदिर का सर्वप्रथम निर्माण कब और किसके द्वारा करवाया गया यह  अज्ञात है। ऐसा कहा जाता है की 2000 वर्ष पूर्व अरण्य वंश के राजा ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। किन्तु क्रूर मुग़ल शासक औरंगजेब ने अपने समय में अनगिनत मंदिरो के साथ इस मंदिर को भी तुड़वा दिया था। उसके बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण ग्वालियर के महाजन गोकुल पाक ने करवाया था।  जिसके बाद रतलाम के महाराजा जावतराज ने इस मंदिर को भव्यता प्रदान की। 

When and by whom Brahma temple was first constructed is unknown. It is said that the king of Aranya dynasty got this temple renovated 2000 years ago. But the brutal Mughal ruler Aurangzeb had demolished countless temples all over India during his time, along with those temples the Brahma temple was also broken. After that the temple was rebuilt by Mahajan Gokul Pak of Gwalior. After which Maharaja Javatraj of Ratlam gave grandeur to this temple. 

 

ब्रह्मा मंदिर का वास्तुशिल्प Brahma Temple Architecture

 ब्रह्मा मंदिर सफ़ेद संगमरमर पत्थर से बनाया  गया है, इस मंदिर के द्वार पर हंस बना हुआ है। मंदिर के गर्भगृह में ब्रह्माजी की चतुर्मुख मूर्ति स्थापित है ब्रह्मा जी के दाहिनी और सावित्री देवी और बायीं और गायत्री देवी के मंदिर है।पास ही में सनकादि की मूर्तियां स्थापित हैं। एक अन्य मंदिर में नारद जी की मूर्ति स्थापित है तथा एक और मंदिर में हाथी पर बैठे कुबेर की मूर्ति स्थापित है।  

The Brahma temple is made of white marble stone, the swan is made at the entrance of this temple. In the sanctum sanctorum of the temple, the idol of Lord Brahma is installed. There are temples of Lord Brahma to the right and Savitri Devi and to the left and Gayatri Devi. Sanakadi idols are installed nearby. Another temple has the statue of Narada installed and another temple has the statue of Kubera sitting on an elephant. 

 

प्रतिवर्ष कार्तिक मास की पूर्णिमा को पुष्कर में मेले आयोजन किया जाता है, इस मेले का हिस्सा बनने लाखों पर्यटक हर साल पुष्कर आते है। कार्तिक मास की पूर्णिमा  के दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि निर्माण करने के लिए यज्ञ का आयोजन किया था। पुष्कर आने वाले सभी तीर्थ यात्री ब्रह्मा मंदिर में दर्शन करने अवश्य आतें है, ब्रह्मा मंदिर से कुछ ही दुरी पर एक छोटी पहाड़ी पर सावित्री देवी का मंदिर भी स्थित है, वहां पर भी बड़ी संख्या में भक्तगण सावित्री देवी के दर्शन करने पहुचतें हैं। 

A fair is organized every year on the full moon day of Kartik in Pushkar Tirtha, millions of tourists visit Pushkar every year to be a part of this fair. On the full moon day of Kartik month, Lord Brahma performed a Yagya to create the universe. All pilgrims coming to Pushkar must visit the Brahma temple, Savitri Devi's temple is also situated on a small hill some distance from the Brahma temple, there are also a large number of devotees reach to see Savitri Devi.

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