Monday, August 3, 2020

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला Supreme Court verdict on Sree Padmanabhaswamy Temple

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला Supreme Court verdict on Sree  Padmanabhaswamy Temple

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन के अधिकारों से सम्बंधित केरल के त्रावणकोर राज परिवार की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए 13 जुलाई 2020 को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया, जिसके अनुसार श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन पर त्रावणकोर राज परिवार के अधिकारों को पहले के समान बरकरार रखा गया है।
On 13 July 2020, the Supreme Court of India gave a verdict, hearing a petition by the Travancore Royal family of Kerala regarding the rights to manage the Sri Padmanabhaswamy Temple, According to which the rights of the Travancore Royal family over the management of Sri Padmanabhaswamy Temple have been retained as before.


इस केस में सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना था की केरल के तिरुअनंतपुरम में स्तिथ श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का प्रबंधन राज्य सरकार देखेगी या इसका प्रबंधन पहले की तरह त्रावणकोर के राज परिवार के हाथो में रहेगा। इस फैसले से सम्बंधित सम्पूर्ण जानकारी इस प्रकार है :-
In this case, the Supreme Court had to decide whether the management of the Sri Padmanabhaswamy Temple at Thiruvananthapuram in Kerala would be handled by the state government or its management would remain in the hands of the royal family of Travancore as before. The complete information related to this decision is as follows: -

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन का इतिहास History of management of Sri Padmanabhaswamy Temple

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर सत्रवीं शताब्दी की शुरुआत से ही केरल के त्रावणकोर साम्राजय के शासको के अधिकार में रहा है। तथा इस मंदिर के वर्तमान स्वरुप का पुनर्निमाण 1733 में त्रावणकोर के राजा मार्तण्ड वर्मा ने करवाया था। 1750 में राजा मार्तण्ड वर्मा ने स्वयं को श्री पद्मनाभस्वामी का सेवक माना और अपने साम्राज्य को श्री पद्मनाभ स्वामी का प्रतिक माना। इस घटना के बाद से त्रावणकोर के सभी राजाओ को पद्मनाभ दास कहा जाने लगा जिसका अर्थ होता है भगवान विष्णु के सेवक। उसी समय से त्रावणकोर के राजा अपने साम्राज्य पर भगवान विष्णु के नाम से शासन करते आ रहें हैं।
Sri Padmanabhaswamy Temple has been under the authority of the rulers of the Travancore kingdom of Kerala since the beginning of the seventeenth century. And the present form of this temple was rebuilt by King Marthanda Varma of Travancore in 1733. In 1750, King Marthanda Varma considered himself a servant of Sri Padmanabhaswamy and considered his empire to be a symbol of Sri Padmanabha Swamy. After this incident, all the kings of Travancore came to be called Padmanabha Das, which means servants of Lord Vishnu. Since that time, the kings of Travancore have been ruling their empire in the name of Lord Vishnu.

भारत पर ब्रिटिश शासन के दौरान भी त्रावणकोर ब्रिटिश शासन के अधीन एक देसी रियासत थी जहाँ त्रावणकोर के शासकों का ही राज चलता था, इसलिए 1947 में भारत के आजाद होने तक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर त्रावणकोर के शासकों के ही नियंत्रण में रहा।
Even during the British rule over India, Travancore was a princely state under the British rule where only the rulers of Travancore ruled, so until the independence of India in 1947, the Sri Padmanabhaswamy Temple remained under the control of the rulers of Travancore.

 भारत के आजादी के बाद जब भारत की सभी देसी रियासतों का भारत में विलय किया जा रहा था, तब त्रावणकोर रियासत के शासकों ने भारत में विलय से पहले शर्त रखी, की भारत में विलय के बाद भी श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की देखभाल और प्रबंधन के सभी अधिकार त्रावणकोर राज परिवार के पास ही रहेंगें। इसलिए उस समय भारत सरकार के द्वारा त्रावणकोर कोच्चि हिन्दू रिलिजियस इंस्टीटूशन्स एक्ट 1951 पास किया गया, इस एक्ट के द्वारा त्रावणकोर के राज परिवार को शिबायत अधिकार प्रदान किये गए, जिसके अंतर्गत एक्ट में लिखा की श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर त्रावणकोर के राज परिवार के पास ही रहेगा और मंदिर की देखरेख, वित्तीय प्रबंधन, पूजा अर्चना के समस्त अधिकार त्रावणकोर के राज परिवार के पास रहेंगें।
After the independence of India, when all the princely states of India were being merged with India, Then the rulers of the princely state of Travancore placed the condition before the merger in India, That Even after the merger in India, all the rights of the care and management of Sri Padmanabhaswamy Temple will remain with the Travancore royal family. Therefore, at that time the Travancore Kochi Hindu Religious Institutions Act 1951 was passed by the Government of India, by this act the royal family of Travancore were given Shibayat rights, Under which the Act has been written that Sri Padmanabhaswamy Temple will remain with the royal family of Travancore and all rights of temple maintenance, financial management and worship will always be with the royal family of Travancore.

भारत की आजादी से पहले जब त्रावणकोर राज्य ब्रिटिश शासन के अधीन एक देसी रियासत था, उस समय त्रावणकोर साम्राज्य के अंतिम राजा श्री चित्र थिरूनल बलराम वर्मा थे, इनका जन्म 1912 में हुआ था, इन्होने 1924 में त्रावणकोर का शासन अपने हाथों में ले लिया था, उस समय इनकी आयु केवल 12 वर्ष थी। राजा श्री चित्र थिरूनल बलराम वर्मा 1991 तक जीवित रहे और तब तक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का सम्पूर्ण प्रबंधन उनके ही पास रहा। 1991 उनकी मृत्यु में बाद उनके छोटे भाई उत्रदम थिरूनल मार्तण्ड वर्मा ने मंदिर का प्रबंधन अपने हाथों में ले लिया।
Before the independence of India, when the state of Travancore was a native princely state under British rule, the last king of the Travancore empire was Sri Chitra Thirunal Balaram Varma, born in 1912, He took the rule of Travancore in his hands in 1924, at that time he was only 12 years old. King Sri Chitra Thirunal Balaram Verma lived till 1991 and till then the entire management of Sri Padmanabhaswamy Temple remained with him. After his death in 1991, his younger brother Utradam Thirunal Martand Verma took over the management of the temple.

2009 में टी पी सुंदरराजन नाम के एक भूतपूर्व आईपीएस ऑफ़िसर ने केरल उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका डाली, जिसके अनुसार श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन के अधिकार त्रावणकोर के राज परिवार से ले लिए जाएं और राज्य सरकार को सौंप दिए जाएं। 
In 2009, a former IPS officer named TP Sundararajan filed a PIL in the Kerala High Court, according to which the rights to manage the Sri Padmanabhaswamy temple should be taken from the Royal family of Travancore and handed over to the state government.

इस याचिका के पीछे टी पी सुंदरराजन का तर्क था, की 1991 में त्रावणकोर के राजा की मृत्यु के बाद उनके भाई उत्रदम थिरूनल मार्तण्ड वर्मा राजा के उत्तराधिकारी नहीं हो सकते, क्योकि 1971 में 26 वें संविधान संशोधन के द्वारा राजाओ के सभी अधिकार ख़तम कर दिए गए थे और 1971 के बाद किसी राजा का कोई उत्तराधिकारी नहीं हो सकता है। इसलिए श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रबंधन को राज परिवार से लेकर राज्य सरकार को सौपा दिया जाये।
TP Sundararajan's reasoning behind this petition was that after the death of the King of Travancore in 1991, his brother Utradam Thirunal Martand Varma could not be the heir of the king,  Because all rights of kings were abolished by the 26th constitutional amendment of India in 1971 and after 1971 no king can have any successor. Therefore, the management of Shri Padmanabhaswamy Temple should be entrusted to the state government from the royal family.

केरल उच्च न्यायलय का फैसला Verdict of Kerala High Court

जनवरी 2011 में केरल उच्च न्यायालय ने टी पी सुंदरराजन की याचिका पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुनाया की श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का प्रबंधन राज्य सरकार द्वारा गठित एक कमेटी के द्वारा किया जायेगा और त्रावणकोर राज परिवार का इस मंदिर पर और इस मंदिर की सम्पतियों पर कोई अधिकार नहीं रहेगा।
In January 2011, the Kerala High Court ruled after hearing the petition of TP Sundararajan, that the Sri Padmanabhaswamy Temple will be managed by a committee constituted by the state government and the Travancore royal family will have no rights over this temple and the properties of this temple.

त्रावणकोर राज परिवार ने केरल उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत मई 2011 में केरल उच्च न्यायालय के फैसले पर स्टे लगा दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया की मंदिर के तहखानों को खोलकर उनसे प्राप्त होने वाली वस्तुओ के सूची सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कमेटी की निगरानी में बनाई जाये, इसके अलावा मंदिर का प्रबंधन भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक कमेटी द्वारा किया जाये। 
The Travancore Royal family challenged the Kerala High Court decision in the Supreme Court and the Supreme Court immediately stayed the Kerala High Court ruling in May 2011. Also, the Supreme Court ordered that the list of items to be opened from the temple's cellars should be made under the supervision of the committee appointed by the Supreme Court, besides the temple should also be managed by a committee constituted by the Supreme Court.

जून 2011 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के कुल छः तहखानों में से पांच तहखानों को खोला गया, इन तहखानों से बहुत अधिक धन सम्पदा प्राप्त हुई, जिनमे हजारों स्वर्ण निर्मित वस्तुएँ, सोने चांदी  सिक्के, कीमती गहने तथा हिरे जवाहरात शामिल थे, यह सम्पदा इतनी अधिक थी की उस समय केवल स्वर्ण का ही मूल्य 22 अरब डॉलर आँका गया। इन सब चीजों की सूची सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी द्वारा बनाई गयी परन्तु इस सूची को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया।
In June 2011, on the order of the Supreme Court, five of the six cellars of Sri Padmanabhaswamy temple were opened, these basements received huge wealth which included thousands of gold-made items, gold silver coins, precious jewels and diamond jewels. This wealth was so high that only gold was valued at $ 22 billion at that time. The list of all these things was made by the committee constituted by the Supreme Court, but this list was never made public.

2013 में त्रावणकोर के राजा उत्रदम थिरूनल मार्तण्ड वर्मा की मृत्यु हो जाती है, जिसके बाद उनके भांजे को उत्तराधिकारी बनाया जाता है। और सुप्रीम कोर्ट में 9 सालो के बाद 13 जुलाई 2020 को इस पुरे मामले पर फैसला सुनाया जाता है।
In 2013, Travancore's successor Utradam Thirunal Martand Verma dies, after which his nephew is made the successor. And after 9 years in the Supreme Court, the judgment on this entire case is given on 13 July 2020.

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला Supreme Court verdict on Shri Padmanabhaswamy Temple

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को सबसे पहले यह तय करना था की उत्रदम थिरूनल मार्तण्ड वर्मा को त्रावणकोर साम्राज्य के अंतिम राजा श्री चित्र थिरूनल बलराम वर्मा का उत्तराधिकारी माना जायेगा या नहीं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने  13 जुलाई 2020 को फैसला सुनाया की त्रावणकोर राज परिवार से धार्मिक रीती रिवाजों वाले अधिकारों को 26वें संविधान संशोधन के अंतर्गत नहीं छीना जा सकता, इसलिए 1951 में त्रावणकोर राज परिवार को जो मंदिर के प्रबंधन से सम्बंधित शिबायत के अधिकार "त्रावणकोर कोच्चि हिन्दू रिलिजियस इंस्टीटूशन्स एक्ट 1951" के द्वारा दिए गए थे, वे सभी अधिकार त्रावणकोर राज परिवार के उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित होतें रहेंगें।
In this case the Supreme Court had to first decide whether Utradam Thirunal Martand Verma would be considered the successor of Sri Chitra Thirunal Balaram Varma, the last king of the Travancore empire. On this, the Supreme Court ruled on 13 July 2020 that the rights of religious customs from the Travancore royal family cannot be taken away under the 26th Constitution Amendment. Therefore, in 1951, the rights of the Shibayat related to the management of the temple to the Travancore Royal family were given by the "Travancore Kochi Hindu Religious Institutions Act 1951", all those rights would be transferred to the heirs of the Travancore Royal family.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया की तिरुअनंतपुरम के जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जायेगा जो मंदिर के प्रशासन का निरिक्षण करेगी।
Apart from this, the Supreme Court ordered that a committee will be set up under the chairmanship of the District Magistrate of Thiruvananthapuram to oversee the administration of the temple.

इस प्रकार एक लम्बी क़ानूनी लड़ाई के बाद त्रावणकोर राज परिवार को श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की देखरेख और प्रबंधन के अधिकार पुनः प्राप्त हुए।
Thus, after a long legal battle, the Travancore Royal family regained the rights to maintain and manage the Sri Padmanabhaswamy Temple.

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