Tuesday, September 29, 2020

Sri Siddhi Vinayak Mandir श्री सिद्धि विनायक मंदिर

श्री सिद्धि विनायक मंदिर Sri Siddhi Vinayak Temple

सिद्धि विनायक मंदिर
 

 श्री सिद्धि विनायक मंदिर भारत में एक अत्यंत प्रसिद्ध गणेश मंदिर है, यह मंदिर भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई नगर में स्थित है। श्री सिद्धिविनायक मंदिर में सभी धर्मो के लोगो की गहरी आस्था है, देश और विदेश में इस मंदिर के भक्तों की संख्या करोड़ों में है। इस मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त श्री सिद्धिविनायक गणेश जी के दर्शन करने आतें है। श्री सिद्धिविनायक मंदिर में मंगलवार का दिन विशेष महत्त्व रखता है, इस दिन मंदिर में भक्तों की संख्या लाखों में पहुँच जाती है, और मंदिर के बाहर भक्तों की लाइन 2 किलोमीटर के ज्यादा लम्बी हो जाती है, इसके अलावा गणेश चतुर्थी के दिन इस मंदिर में भक्तों की संख्या इतनी अधिक हो जाती है, की जिसका आंकलन करना अत्यंत कठिन है। श्री सिद्धिविनायक अपने भक्तों की सभी इच्छाएँ अवश्य ही पूरी करतें हैं। श्री सिद्धिविनायक मंदिर में भक्त बहुत अधिक दान देतें है, इसलिए इस मंदिर की गिनती भारत के कुछ सबसे अमीर मंदिरो में की जाती है। 

Shri Siddhi Vinayak Temple is a very famous Ganesh temple in India, this temple is located in the financial capital of India, Mumbai city. People of all religions have deep faith in Shri Siddhivinayak Temple, the number of devotees of this temple in the country and abroad is in crores. Thousands of devotees visit Shri Siddhivinayak Ganesh ji daily in this temple. Tuesday has special significance in Sri Siddhivinayak Temple, on this day the number of devotees in the temple reaches in lakhs, and the line of devotees outside the temple is more than 2 kilometers long. Apart from this, on the day of Ganesh Chaturthi, the number of devotees in this temple increases so much, which is very difficult to estimate. Shri Siddhivinayak fulfills all the wishes of his devotees. Devotees make a lot of donations to the Sri Siddhivinayak temple, so this temple is counted among some of the richest temples in India.

 

श्री सिद्धिविनायक गणेश जी की मूर्ति Statue of Shri Siddhivinayak Ganesha

श्री सिद्धिविनायक मंदिर में श्री गणेश जी का चतुर्भुज मूर्ति स्थापित है, इस मूर्ति में श्री गणेश जी को बैठी हुई अवस्था में दिखाया गया है। श्री गणेश जी की इस मूर्ति काले पत्थर की एक ही शिला से बनाया गया है, इस मूर्ति की ऊंचाई लगभग ढाई फ़ीट और चौड़ाई लगभग दो फ़ीट है। इस मूर्ति के ऊपरी दाएं हाथ में कमल का फूल है और ऊपरी बाएं हाथ में एक कुल्हाड़ी है, निचे वाले दाएं हाथ में एक मोतियों की माला है और निचे वाले बाएं हाथ में मोदक से भरा हुआ कटोरा है। गले में एक सर्प जनेऊ की तरह लिपटा है। माथे पर एक तीसरा नेत्र स्थित है, जो भगवान शिव के तीसरे नेत्र के समान है। श्री गणेश जी की मूर्ति के दोनों तरफ उनकी पत्नियाँ रिद्धि और सिद्धि की मूर्तियां स्थापित है। रिद्धि और सिद्धि को सौभाग्य और सफलता के देवियाँ माना जाता है। 

A statue of Shri Ganesh Ji with four hands is installed in Sri Siddhivinayak Temple, in this statue Shri Ganesh Ji is shown in a sitting position.  This idol of Shri Ganesh ji is made from a single rock of black stone, the height of this idol is about two and a half feet and the width is about two feet. The idol has a lotus flower in the upper right hand and an axe in the upper left hand, a beads garland in the lower right hand and a bowl filled with modak in the lower left hand. A snake is wrapped around the neck like Janeu. A third eye is located on the forehead, which is similar to the third eye of Lord Shiva. Statues of Riddhi and Siddhi, his wives, are installed on both sides of the idol of Shri Ganesh. Riddhi and Siddhi are considered goddesses of good fortune and success.

 

श्री गणेश की अधिकतर मूर्तियों की सूंड बायीं और मुड़ी होती है लेकिन श्री सिद्धिविनायक गणेश जी की इस मूर्ति की सूंड दायीं ओर मुड़ी है, जिन मंदिरो में गणेश जी की प्रतिमा की सूंड दायी और मुड़ी होती है उन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है, इसलिए इस मंदिर में गणेश जी को श्री सिद्धिविनायक कहा जाता है। महाराष्ट्र में पौराणिक काल के आठ प्रसिद्ध गणेश मंदिर है, जिन्हे अष्टविनायक कहा जाता है, ये सभी सिद्ध पीठ माने जाते है। लेकिन श्री सिद्धि विनायक मंदिर की गिनती इन अष्टविनायक मंदिरों में नहीं होती, फिर भी इस मंदिर में गणपति पूजा का विशेष महत्व है। 

Most of the idols of Shri Ganesha have trunk turned to the left, but the trunk of this idol of Shri Siddhivinayak Ganesha is turned to the right, The temples where Ganesha's idol's trunk turned to the right are called Siddhapeeth, Therefore, Ganesh ji in this temple is called Sri Siddhivinayak.There are eight famous Ganesh temples of mythological period in Maharashtra, called Ashtavinayak, all of which are considered Siddha Peeth. But Sri Siddhi Vinayak Temple is not counted in these Ashtavinayak temples, yet Ganapati Puja has special significance in this temple.

 

श्री सिद्धिविनायक मंदिर का वास्तुशिल्प Architecture of Shri Siddhivinayak Temple

श्री सिद्धिविनायक मंदिर का निर्माण 1801 में एक स्थानीय ठेकेदार द्वारा किया गया था, इस मंदिर के निर्माण में लगने वाली धनराशि एक कृषक महिला द्वारा दी गयी थी। यह मंदिर बहुत ही छोटा था, जिसमे एक गर्भगृह, एक हॉल, कुछ खुला स्थान और एक प्रशासनिक कार्यालय था। इस मंदिर का पुनर्निर्माण 1990 में शुरू किया गया, मंदिर का पुनर्निर्माण करते समय गर्भगृह और मूर्ति की सुरक्षा और पवित्रता का विशेष ध्यान रखते हुए, गर्भगृह के आसपास इस मंदिर को विस्तार दिया गया। यह निर्माण कार्य 3 वर्ष तक चला, जिसमे उस समय लगभग 3 करोड़ रूपए खर्च किये गए थे। मंदिर के निर्माण में संगमरमर और गुलाबी ग्रेनाइट पत्थर  प्रयोग गया था।  इस मंदिर को 5 मंजिलों वाला बनाया गया, जिसमे प्रत्येक मंजिल को अलग अलग कार्यो के लिए  उपयोग में लाया जाता  है जो की इस प्रकार है :- 

The Shree Siddhivinayak Temple was constructed in 1801 by a local contractor, the funds for the construction of this temple were given by an agricultural woman. The temple was very small, containing a sanctum sanctorum, a hall, some open spaces and an administrative office. The reconstruction of this temple was started in 1990, While renovating the temple, this temple was expanded around the sanctum sanctorum, taking special care of the security and sanctity of the sanctum sanctorum. This construction work lasted for 3 years, in which around 3 crores rupees was spent at that time. Marble and pink granite stone were used in the construction of the temple. This temple has been made of 5 floors, in which each floor is used for different tasks, which is as follows: - 

 

प्रथम मंजिल पर गर्भगृह स्थित है, जिसमे श्री सिद्धिविनायक गणेश जी की मूर्ति स्थापित है, प्रथम मंजिल का उपयोग पूजा और दर्शन के लिए किया जाता है। 

The sanctum sanctorum is located on the first floor, in which the idol of Shri Siddhivinayak Ganesh Ji is installed, the first floor is used for worship and darshan. 

 

दूसरी मंजिल पर मंदिर का रसोईघर स्थित है, जिसमे देवता के लिए प्रसाद बनाया जाता है।

The temple's kitchen is located on the second floor, in which offerings are made for the deity. 

 

तीसरी मंजिल पर मंदिर का प्रशासनिक कार्यालय स्थित है, जहाँ मंदिर समिति के सदस्यों के कक्ष बनाये गए है,  इसके अलावा आधुनिक कंप्यूटर कक्ष और सुचना और डाटा प्रोसेसिंग कार्यालय भी इसी मंजिल पर स्थित है।

The administrative office of the temple is located on the third floor, where the chambers of the members of the temple committee are made, besides the modern computer room and the information and data processing office are also located on this floor.  

 

चौथी मंजिल पर पुस्तकालय बनाया गया है, जिसमें धर्म, साहित्य, इंजिनीरिंग, चिकित्सा, अर्थशास्त्र  सम्बंधित 8000 से अधिक पुस्तकों का संग्रह है। 

A library has been built on the fourth floor, which has a collection of more than 8000 books related to religion, literature, engineering, medicine, economics. 

 

पांचवी मंजिल पर त्योहारों से सम्बंधित और प्रसाद बनाने सम्बंधित सामग्री रखी जाती है। 

On the fifth floor, materials related to festivals and making offerings are kept. 

 

श्री सिद्धिविनायक मंदिर को इस प्रकार बनाया गया है, की इसमें गर्भगृह के ऊपर शिखर तक खुला स्थान है,  सभी मंजिले गर्भगृह के चारों ओर स्थित परिक्रमा मार्ग के स्थान को छोड़कर बनाई गयी है, जिसके कारण मंदिर की किसी भी मंजिल पर उपस्थित लोग पवित्र गर्भगृह के ऊपर से होकर नहीं चल सकते। श्री सिद्धिविनायक मंदिर का शिखर कई गुम्बदों का समूह है, सभी गुम्बदों पर कलश बनाये गए है, मंदिर के मुख्य गुम्बद का कलश 12 फुट उचाई का है,  इस मुख्य कलश के साथ बाकि सभी गुम्बदों के कलश सोने से मढ़े गए है। मंदिर के शिखर पर स्थित सभी स्वर्ण कलश मंदिर की भव्यता और  देवता की शक्ति का प्रतिनिधित्व करते है। वे लोग जो मंदिर में अधिक भीड़ और समय की कमी के कारण देवता का दर्शन नहीं कर पाते वे लोग दूर से ही इस मंदिर के शिखर का दर्शन कर लेतें है। श्री सिद्धिविनायक मंदिर में प्रवेश के लिए दो द्वार है जिन्हे रिद्धि द्वार और सिद्धि द्वार कहा जाता है।  

The Sri Siddhivinayak Temple has been built in such a way that it has open space to the summit above the sanctum sanctorum. All the floors are built except for the place of the circumambulation passage around the sanctum sanctorum, due to which people present on any floor of the temple cannot walk through over the sanctum sanctorum. The crest of the Sri Siddhivinayak temple is a cluster of several domes, the vase is carved on all the domes, the height of main dome vase is 12 feet, with this main vase the urns of all the other domes are gold plated. All the golden urns on the summit of the temple represent the grandeur and power of the deity of the temple. Those people who are unable to see the deity due to overcrowding and lack of time in the temple, they take a glimpse of the peak of this temple from a distance. There are two gates for entry into the Sri Siddhivinayak Temple which are called the Riddhi Gate and Siddhi Gate.

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