Monday, September 21, 2020

श्री तनोट माता मंदिर Sri Tanot Mata Temple Jaisalmer

Sri Tanot Mata Temple Jaisalmer

 श्री तनोट माता मंदिर जैसलमेर

श्री तनोट माता मंदिर

श्री तनोट माता मंदिर एक बहुत ही प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है, यह मंदिर राजस्थान राज्य के जैसलमेर जिले में भारत और पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर के समीप स्थित है। तनोट माता मंदिर राजस्थान के सबसे प्रमुख मंदिरो में से एक है। यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है, इस मंदिर में हमेशा से ही भक्तों की गहरी आस्था रही है, लेकिन 1965 में भारत और पाकिस्तान के युद्ध के बाद यह मंदिर अपने चमत्कारों के कारण देश और विदेश में प्रसिद्ध हो गया है। उस युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना द्वारा इस मंदिर पर 3000 से अधिक बम गिराए गए लेकिन उनमे से एक भी बम नहीं फटा, उनमें से 450 जिंदा बम आज भी मंदिर परिसर में बने संग्राहलय में भक्तों के दर्शन के लिए सुरक्षित रखे गए है। भारतीय सेना की इस मंदिर में गहरी आस्था है, इस मंदिर का सम्पूर्ण प्रबंधन और देखरेख BSF (बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स) द्वारा किया जाता है। मंदिर में पूजा अर्चना भी BSF के जवानों द्वारा ही की जाती है। 

Shri Tanot Mata Temple is a very famous Hindu temple, this temple is located in the Jaisalmer district of Rajasthan state near the international border of India and Pakistan. Tanot Mata Temple is one of the most prominent temples of Rajasthan. This temple is almost 1200 years old, the temple has always had a deep faith in the devotees, but after the 1965 India and Pakistan war, this temple has become famous at home and abroad due to its miracles. During that war, more than 3000 bombs were dropped on this temple by Pakistani army but not one of them exploded, Out of them, 450 live bombs are still preserved in the museum built in the temple premises for the devotees to see. The Indian Army has deep faith in this temple, the entire management and maintenance of this temple is done by BSF (Border Security Force). Pooja archana in the temple is also done by BSF Soldiers only.

 

श्री तनोट माता का इतिहास History of Sri Tanot Mata

श्री तनोट माता को श्री हिंगलाज माता का ही एक रूप माना जाता है, तथा तनोट माता को आवड माता के नाम से भी जाना जाता है। श्री तनोट माता का इतिहास 1200  साल अधिक पुराना है। आठवीं शताब्दी में राजस्थान के माड़ प्रदेश (वर्तमान जैसलमेर जिला) के चेलक नामक गांव में मामड़िया नाम के चारण रहते थे, उनके कोई संतान नहीं थी इसलिए संतान प्राप्त करने के लिए उन्होंने श्री हिंगलाज माता शक्तिपीठ (वर्तमान में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रान्त में स्थित) की सात बार पैदल यात्रा की। जिससे प्रसन्न होकर श्री हिंगलाज माता ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिए और उनकी इच्छा पूछी, तब मामड़िया जी ने कहा मेरी इच्छा है की आप मेरे घर में जन्म लें, तब श्री हिंगलाज माता ने प्रसन्न होकर कहा ऐसा ही होगा। 

Shri Tanot Mata is considered as a form of Sri Hinglaj Mata, and Tanot Mata is also known as Aavad Mata. The history of Shri Tanot Mata is more than 1200 years old. In the eighth century, a Charan named Mamadia lived in a village called Chelak in the Maad State (Present Jaisalmer District) of Rajasthan. He had no children, so he traveled seven times on foot to Shri Hinglaj Mata Shaktipeeth (Currently located in Baluchistan province of Pakistan) to get children. Pleased by which Sri Hinglaj Mata appeared to him in a dream and asked his wish, Then Mamadia ji said that I wish you were born in my house, then Sri Hinglaj Mata was pleased and said that this will happen. 


विक्रम संवत 808 (751 ईस्वी) चैत्र सुदी नवमी मंगलवार के दिन, मामड़िया जी के घर श्री हिंगलाज माता ने एक कन्या के रूप में जन्म लिया, जिसका नाम आवड देवी रखा गया, यह कन्या अत्यंत चमत्कारी थी, इन्होने बचपन से ही अनेक चमत्कार दिखने शुरू कर दिए, बाद में यही कन्या श्री तनोट राय माता के नाम प्रसिद्ध हुई। श्री तनोट माता (आवड देवी) के बाद मामड़िया जी को 6 और पुत्रियों की प्राप्ति हुई, जिनका नाम क्रमशः आशी, सेसी, गेहली, होल, रूप तथा लाग था। 

Vikram Samvat 808 (751 AD) On the day of Chaitra Sudi Navami Tuesday, Shri Hinglaj Mata was born as a girl, who was named Aawad Devi, this girl was very miraculous, she started showing many miracles since childhood. Later this girl became famous in the name of Shri Tanot Rai Mata. After Shri Tanot Mata (Avad Devi) Mamadia ji received 6 more daughters, whose names were Aashi, Sesi, Gehli, Hole, Roop and Laag respectively.

 

श्री तनोट माता की कृपा से माड़ प्रदेश के भाटी राजपूतों ने हूणों के आक्रमण से माड़ प्रदेश की रक्षा की जिसके बाद भाटी राजपूतो का माड़ प्रदेश में सुद्रढ़ राज्य स्थापित हो गया। तनोट के राजा तनुराव भाटी ने विक्रम संवत 847 (790 ईस्वी) को तनोट गढ़ की नींव रखी, तथा विक्रम संवत 888 (831 ईस्वी) में तनोट दुर्ग और श्री तनोट माता के मंदिर की प्रतिष्ठा करवाई थी। 

With the grace of Shri Tanot Mata, the Bhati Rajputs of Maar state protected Maad region from the invasions of the Huns, after which a strong state was established in the Maad region of Bhati Rajputs. Tanurava Bhati, the king of Tanot, laid the foundation of the Tanot citadel on Vikram Samvat 847 (790 AD), and erected Tanot Durg and the temple of Sri Tanot Mata in Vikram Samvat 888 (831 AD).


श्री तनोट माता मंदिर और भारत-पाकिस्तान का युद्ध  Sri Tanot Mata Temple and Indo-Pakistan War

1965 में भारत और पाकिस्तान में युद्ध छिड़ गया था, इस युद्ध में पाकिस्तान ने जैसलमेर के रस्ते से भारत पर आक्रमण किया। इस युद्ध में पाकिस्तान ने लड़ाकू हवाई जहाजों और तोपों के द्वारा श्री तनोट माता के मंदिर पर 3000 से अधिक बम गिराए, लेकिन उनमे से एक भी बम नहीं फटा और मंदिर को खरोंच तक नहीं आयी। मंदिर का यह चमत्कार देख कर भारतीय सैनिको में जोश भर गया, जिसके बाद भारतीय सेना ने  आसानी से पाकिस्तानी सेना को हरा दिया और भारत इस युद्ध को जीत गया। 

In 1965, war broke out in India and Pakistan, in this war, Pakistan invaded India through the route of Jaisalmer, Pakistan dropped more than 3000 bombs on the temple of Shri Tanot Mata using fighter airplanes and cannons, but not one of them exploded and the temple did not even scratch. Seeing this miracle of the temple, the Indian soldiers got excited, after which the Indian army easily defeated the Pakistani army and India won this war. 

 

इस युद्ध में श्री तनोट माता के चमत्कारों से पाकिस्तानी सेना भी आश्चर्य में पड़ गयी थी, उनके अनुसार जब भी वे हवाई जहाज से मंदिर को निशाना बनाकर बम गिरते थे तो उन्हें मंदिर के स्थान पर एक तालाब दिखाई देता था, जिसके किनारे पर एक छोटी बच्ची बैठी रहती थी। 1965 के युद्ध के बाद श्री तनोट माता के चमत्कारों के आगे नतमस्तक होकर पाकिस्तानी सेना के ब्रिगेडियर शाहनवाज खान ने भारत सरकार से अनुमति लेकर इस मंदिर में देवी के दर्शन किये और एक चांदी  छत्र चढ़ाया। ब्रिगेडियर शाहनवाज खान के द्वारा चढ़ाया गया वह छत्र आज भी मंदिर परिसर में भक्तो के दर्शन के लिए रखा हुआ है। 

The Pakistani army was also surprised by the miracles of Shri Tanot Mata in this war, according to them, whenever they used to bomb the temple by airplane, they saw a pond in the place of the temple, on the bank of which a small girl used to sit. After 1965 war, Brigadier Shahnawaz Khan of the Pakistani Army Impressed by the miracles of Shri Tanot Mata and he saw Sri tanot mata temple with permission from the Government of India and offered a silver Chhatra (Umbrella) in the temple. The Chhatra offered by Brigadier Shahnawaz Khan is still kept in the temple premises for the devotees to see.


1971 में पुनः भारत और पाकिस्तान में युद्ध हुआ, इस युद्ध में पाकिस्तान ने फिर से जैसलमेर के ओर से हमला किया, इस बार पाकिस्तान ने श्री तनोट माता मंदिर से कुछ दुरी स्थित लोंगेवाला गांव पर हमला किया, पाकिस्तानी सेना ने रात में अचानक पूरी टैंक रेजिमेंट के साथ इस गांव पर हमला किया था, उनके मुकाबले में भारतीय सेना की केवल 120 जवानो की एक कंपनी तैनात थी। लेकिन श्री तनोट माता के चमत्कार से 120 भारतीय जवानो की उस कंपनी ने पाकिस्तान की पूरी टैंक रेजिमेंट को धूल चटा दी थी, और लोंगेवाला गांव को पाकिस्तानी सेना के टैंको का कब्रगाह बना दिया था। 

There was a war in India and Pakistan again in 1971, in this war, Pakistan again attacked from Jaisalmer, this time Pakistan attacked Longewala village located some distance away from Shri Tanot Mata temple, The Pakistani army suddenly attacked the village at night with a full Tank Regiment, A company of only 120 personnel of the Indian Army was stationed against them. But by the miracle of Shri Tanot Mata, that company of 120 Indian jawans had destroyed the entire tank regiment of Pakistan, and made the village of Longewala a cemetery of Pakistani tanks. 

 

लोंगेवाला की जीत के बाद भारतीय सेना के द्वारा श्री तनोट माता मंदिर परिसर में एक विजय स्तंभ  निर्माण करवाया गया, जहाँ हर वर्ष 16 दिसंबर को उत्सव मनाया जाता है। 

 After Longewala's victory, a victory pillar was constructed by the Indian Army in the Sri Tanot Mata temple complex, where the festival is celebrated every year on 16 December.

 

 इस युद्ध के बाद भारतीय सेना की आस्था इस मंदिर में और अधिक बढ़ गयी, जिसके बाद इस मंदिर के देखरेख का जिम्मा BSF ने अपने हाथों में ले लिया। इस मंदिर में देश और विदेश के भक्तों की भी गहरी आस्था है। नवरात्रों के दौरान बड़ी संख्या में भक्त इस मंदिर में श्री तनोट माता के दर्शन करने पहुंचते है। श्री तनोट माता को रुमाल वाली देवी के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में आने वाले भक्त मंदिर में रुमाल बांधते है और श्री तनोट  माता से मन्नत माँगतें है, मन्नत पूरी होने पर भक्त पुनः मंदिर आते है और देवी के प्रति आभार व्यक्त करतें है। 

After this war, the faith of the Indian Army grew more in this temple, after which BSF took over the responsibility of maintaining this temple. The devotees of the country and abroad also have deep faith in this temple. During the Navratras, a large number of devotees visit here to see Shri Tanot Mata. Shri Tanot Mata is also known as the handkerchief goddess. Devotees who come to the temple tie a handkerchief in the temple and pray vow to Shri Tanot Mata, after the vow is complete, the devotees again come to the temple and express their gratitude to the Goddess.


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