Tuesday, October 6, 2020

जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के रोचक तथ्य Interesting facts of Jagannath Puri Ratha Yatra

Interesting facts of Shri Jagannath Puri Ratha Yatra

श्री जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के रोचक तथ्य

Shri Jagannath Puri Ratha Yatra, Odisha

भारत के ओडिशा राज्य के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथपुरी मंदिर में प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की शुक्लपक्ष की द्वितीय तिथि को विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा उत्सव का आयोजन किया जाता है, यह रथयात्रा विश्व की सबसे बड़ी रथयात्रा मानी जाती है। इस रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियों को फूलों से सुसज्जित अलग-अलग भव्य रथों में बिठाकर यात्रा निकली जाती है। इस रथयात्रा के दौरान पुरी के राजा रथों के आगे सोने के झाड़ू से रास्ता साफ़ करतें हैं। इस यात्रा में सबसे आगे भगवान बलभद्र का रथ चलता है, बीच में भगवान की बहन देवी सुभद्रा का रथ चलता है और सबसे आखिर में भगवान जगन्नाथ का रथ चलता है। इस रथयात्रा में लाखों भक्त इकट्ठे होते है और रथों को रस्सों से खीचतें है। ऐसा माना जाता है की इस रथयात्रा में शामिल होने वाले को 100 यज्ञ करने के बराबर पुण्य मिलता है। पुराणों के अनुसार प्रत्येक हिन्दू व्यक्ति की जीवन में एक बार इस यात्रा में अवश्य हिस्सा लेना चाहिए। 

The world famous Ratha Yatra festival is organized every year on the second date of Shukla Paksha of Ashadha month in Shri Jagannath Puri temple located in puri, Odisha state of india. This Ratha Yatra is considered to be the biggest Ratha Yatra in the world. In this ratha yatra, the journey of Lord Jagannath, his elder brother Balabhadra and sister Subhadra, is carried out in different grand chariots equipped with flowers. During this ratha yatra, the king of Puri clear the path of chariots with a golden broom. Lord Balabhadra's chariot runs at the forefront of this journey, in the middle runs the chariot of the Goddess Subhadra and lastly the chariot of Lord Jagannath. Lakhs of devotees gather in this ratha yatra and pull the chariots with ropes. It is believed that the person involved in this ratha yatra gets a virtue equivalent to performing 100 yagyas. According to the Puranas, every Hindu person must take part in this journey once in their life. 

 

इस रथयात्रा में भगवन जगन्नाथ पुरुषोत्तम क्षेत्र में स्थित अपनी मौसी, रानी गुंडिचा के घर जातें हैं, जो की प्रसिद्ध श्री गुंडेचा देवी का मंदिर है। श्री गुंडेचा देवी मंदिर में भगवान जगन्नाथ 8 दिनों तक आराम करतें हैं, जिसके बाद आषाढ़ शुक्ल दसमी को पुनः वापसी की यात्रा होती है। इस पुरे मार्ग में इन रथों को भक्त ही खींचकर लाते है और वापस ले जाते है। यह यात्रा पौराणिक काल से चली आ रही है, इस यात्रा का वर्णन पदम् पुराण, स्कंद पुराण, नारद पुराण, ब्रह्म पुराण आदि पुराणों में भी मिलता है। 

In this ratha yatra, Bhagavan Jagannath goes to his maternal aunt Rani Gundicha's house, located in the Purushottam region, which is the famous temple of Sri Gundecha Devi. Lord Jagannath rests for 8 days in the Sri Gundecha Devi temple, after which the return journey to Ashadh Shukla Dasmi takes place. In this entire path, devotees drag and carry these chariots. This journey has been going on since the mythological period, the description of this journey is also found in the Puranas like Padam Purana, Skanda Purana, Narada Purana, Brahma Purana etc.


श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के रथों की बनावट Design of chariots of Shri Jagannath Ratha Yatra

श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के तीनों रथों के अलग अलग नाम और विशेस्ताएं होती है, ये सभी रथ लकड़ी से बनाए जातें हैं, इन रथों बनाने में प्रयोग में आने वाली सामग्री और इन रथों का आकर पहले से ही निश्चित होता है, इसलिए हर बार इन रथों को निश्चित सामग्री द्वारा और निश्चित आकार में बनाया जाता है। इन रथों के कुछ विशेस्ताएं इस प्रकार हैं :- 

The three chariots in the Shri Jagannath Ratha Yatra have different names and specialties, all these chariots are made from wood, the material used to make these chariots and the size of these chariots is already fixed, so every time These chariots are made by fixed materials and in fixed shapes. Some of the specialties of these chariots are as follows: -

 

भगवान बलभद्र का रथ, Chariot of god balabhadra

भगवान बलभद्र का रथ इस यात्रा में सबसे आगे चलता है, इस रथ को तलध्वज नाम से बुलाया जाता है, इस रथ को बनाने में 731 लकड़ी के टुकड़े प्रयोग किये जातें है, इस रथ में 14 पहिये लगाए जाते हैं, जिनका व्यास साढ़े छः फुट होता है, तथा इस रथ की ऊंचाई 45 फुट होती है। जिस रस्से से  इस रथ को खींचा जाता है उसे वासुकि कहतें है। इस रथ में लाल और हरे रंग का प्रयोग अधिक किया जाता है। 

Lord Balabhadra's chariot leads in this journey, this chariot is called Taladhwaj, 731 pieces of wood are used to make this chariot, 14 wheels are mounted in this chariot, which is six and a half feet in diameter, and the height of this chariot is 45 feet. The rope from which this chariot is drawn is called Vasuki. Red and Green color is used more in this chariot.

 

देवी सुभद्रा का रथ, Chariot of Goddess Subhadra

देवी सुभद्रा का रथ इस यात्रा में मध्य में चलता है, इस रथ को देवदलन और दर्पदलन कहा जाता है। इस रथ के ऊपर सुदर्शन चक्र बनाया जाता है जो देवी सुभद्रा के रथ की रक्षा करता है। इस रथ को बनाने में 711 लकड़ी के टुकड़ों का प्रयोग किया जाता है। इस रथ की ऊंचाई 44 फुट और 6 इंच रखी जाती है। इस रथ को जिस रस्से से खींचा जाता है उसे स्वर्णचूड़ कहा जाता है। इस रथ में लाल और काले रंग का प्रयोग अधिक किया जाता है। 

The chariot of Goddess Subhadra runs in the middle in this journey, this chariot is called Devdalan and Darpadalan. The Sudarshan Chakra is made on top of this chariot which protects the chariot of Goddess Subhadra. 711 pieces of wood are used to make this chariot. The height of this chariot is kept at 44 feet and 6 inches. The rope by which this chariot is drawn is called Swarnachhud. Red and black colors are more used in this chariot.

 

भगवान जगन्नाथ का रथ, Chariot of lord jagannath

भगवान जगन्नाथ का रथ यात्रा में सबसे आखिर में चलता है। इस रथ को नंदिघोष कहा जाता है। इस रथ को बनाने में 742 लकड़ी के टुकड़ों का प्रयोग किया जाता है। इस रथ में 16 पहिये लगाए जातें है, जिनका व्यास 7 फुट होता है। इस रथ की उचाई 45 फुट और 6 इंच रखी जाती है। जिस रस्से से इस रथ को खींचा जाता है उसे शंखचूड़ कहा जाता है। इस रथ में अधिकतर लाल और सुनहरे रंग का प्रयोग किया जाता है। 

Lord Jagannath's chariot runs at the end of the journey. This chariot is called Nandighosh. 742 pieces of wood are used to make this chariot. This chariot consists of 16 wheels, which are 7 feet in diameter. The height of this chariot is 45 feet and 6 inches. The rope by which this chariot is drawn is called Shankhchud. Mostly red and golden colors are used in this chariot.

 

श्री जगन्नाथ पुरी रथयात्रा की कहानी / Story of Shri Jagannath Puri Ratha Yatra

श्री जगन्नाथ रथयात्रा की कथा के अनुसार ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा के दिन भगवान श्री जगन्नाथ का जन्म होता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को मंदिर के पास बने स्नान मंडप ले जाया जाता है। स्नान मंडप में भगवान को शीतल जल के 108 कलशों से स्नान कराया जाता है, मान्यता है की इस स्नान से भगवान बीमार हो जातें है और उन्हें बुखार आ जाता है। इसके बाद भगवान को 15 दिनों के लिए एक विशेष कक्ष में रखा जाता है, इस कक्ष में भगवान की सेवा वैद्य और उनके निजी सेवक करते है। इन 15 दिनों के दौरान भगवान को ओषधि, फल और दलिये का भोग लगाया जाता है। 15 दिन के बाद भगवान स्वस्थ हो जाते है,  जिसके बाद आषाढ़ मास की शुक्लपक्ष की द्वितीय तिथि को भगवान श्री जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ अलग-अलग रथों पर सवार होकर अपनी बुआ के घर ( श्री गुंडेचा देवी के मंदिर) जातें है। भगवान जगन्नाथ की यही यात्रा प्रसिद्ध जगन्नाथपुरी रथयात्रा कहलाती है।

According to the legend of Shri Jagannath Ratha Yatra, Lord Shri Jagannath is born on the full moon day of Jyestha month. On this day Lord Jagannath, his brother Balabhadra and sister Subhadra are taken to the bathing pavilion near the temple. In the bath pavilion, the Lord is bathed with 108 urns of cold water, it is believed that by this bath God becomes ill and he gets fever.  After this, the Lord is kept in a special room for 15 days, in this room the Lord is served by his personal servants. During these 15 days, the Lord is offered medicine, fruits and porridge. After 15 days, the Lord recovers. After which, on the second date of Shukla Paksha of Ashada month, Lord Shri Jagannath along with his elder brother Balabhadra and sister Subhadra ride on different chariots and go to their aunt's house (temple of Shri Gundecha Devi). This journey of Lord Jagannath is called the famous Jagannathpuri Ratha Yatra.

 

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