Friday, November 20, 2020

ज्वाला जी मंदिर और मुग़ल शासक अकबर Jwala ji Temple and Mughal ruler Akbar

 Jwala ji Temple and  Mughal ruler Akbar ज्वाला जी मंदिर और मुग़ल शासक अकबर

Jwala Ji Mandir

ज्वाला जी मंदिर भारत में स्थित एक अतिप्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है, यह मंदिर भारत के परम पवित्र 51 शक्तिपीठों में से एक है, यह मंदिर भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा जिले में स्थित है, यहां माता सती की जीभ गिरी थी। यह मंदिर दुर्गा देवी को समर्पित है, देवी का यह मंदिर अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है,  इस मंदिर में देवी की मूर्ति के स्थान पर ज्वाला की पूजा की जाती है। इस मंदिर में 9 प्राकृतिक ज्वालाएं हर समय प्रज्वलित रहती है, ये ज्योतियाँ अलग अलग देवियों की प्रतिक मानी जाती है जिनके नाम श्री महाकाली, श्री अन्नपूर्णा, श्री चंडी, श्री हिंगलाज, श्री अम्बिका, श्री विंध्यवासिनी, श्री महालक्ष्मी, श्री सरस्वती, और श्री अंजीदेवी है। ये ज्वालाएं चमत्कारिक मानी जाती हैं, इन ज्योतियों के ऊपर मंदिर बनाए गए है, जहाँ इनकी पूजा की जाती है।

Jwala ji temple is a very famous Hindu temple located in India, this temple is one of the 51 sacred Shaktipeeths of India, this temple is located in Kangra district of Himachal Pradesh state of India, where the tongue of Goddess Sati fell. This temple is dedicated to Durga Devi, this temple of Goddess is unique compared to other temples, flame is worshiped in place of the idol of Goddess in this temple. The nine natural flame in this temple are ignited all the time, these flames are considered to be a symbol of different goddesses named Shri Mahakali, Sri Annapurna, Sri Chandi, Sri Hinglaj, Sri Ambika, Sri Vindhyavasini, Sri Mahalakshmi, Sri Saraswati, and Sri Anjidevi. These flames are considered to be miraculous, temples have been built over these flames, where they are worshiped.

 

ज्वाला जी मंदिर और मुग़ल शासक अकबर का इतिहास History of Jwala ji temple and  Mughal ruler Akbar

भारत में जब मुग़ल शासक अकबर का शासन था, उस समय दुर्गा देवी का एक भक्त जिसका नाम ध्यानू था, वह 1000 यात्रियों के साथ ज्वाला जी मंदिर में देवी के दर्शन के लिए जा रहा था। यात्रिओं के इतने बड़े दल को देखकर अकबर के सैनिकों ने दिल्ली के चांदनी चौक  पर उन्हें रोक लिया और अकबर के दरबार में उन्हें पेश किया। अकबर ने उनसे पूछा तुम सब लोग एक साथ कहाँ जा रहे हो, तब भक्त ध्यानु ने उत्तर दिया की हम लोग देवी के दर्शन करने के लिए ज्वाला जी मंदिर जा रहें है। हम हर साल वहाँ जातें है। अकबर ने पूछा ये ज्वाला देवी कौन है और उनके दर्शन करने से क्या होगा। तब भक्त ध्यानु ने जवाब दिया, की ज्वाला देवी इस संसार की रचना करने वाली और संसार का पालन करने वाली देवी है, वे भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी करती हैं। उनका प्रताप ऐसा है की उनके मंदिर में बिना तेल और बाती के ही दिव्य ज्योत हर समय जलती रहती है। 

In India, when the Mughal ruler Akbar ruled, a devotee of Durga Devi, named Dhyanu, was going to the Jwala ji temple with 1000 pilgrims to see the goddess. Seeing such a large group of travelers, Akbar's soldiers stopped them at Delhi's Chandni Chowk and presented them to Akbar's court. Akbar asked them where are all of you going together, then the devotee Dhyanu replied that we are going to Jwala ji temple to see Goddess. We go there every year. Akbar asked who is this goddess Jwala and what would happen if you visit her. Then the devotee Dhyanu replied, Jwala Devi is the Goddess who creates this world and preserver the world, she fulfills all the wishes of the devotees. Her majesty is such that in her temple, the holy flame keeps burning all the time without oil and wick.


तब अकबर ने कहा की हमें कैसे यकींन होगा की तुम्हारी ज्वाला देवी इतनी शक्तिशाली है और तुम्हारी मनोकामनाएं पूरी करती है। इसलिए परीक्षा के लिए हम तुम्हारे घोड़े  की गर्दन कटवा देते है, यदि तुम्हारी देवी में सामर्थ्य है, तो तुम उनसे कहकर अपने घोड़े को फिर से जीवित करवा लेना। इस प्रकार भक्त ध्यानु के घोड़े की गर्दन काट दी गयी, तब भक्त  ध्यानु ने अकबर से विनती की, की एक महीने की अवधि तक घोड़े के सिर और धड़ को सुरक्षित रखे। अकबर ने भक्त ध्यानु की बात मान ली और उन्हें आगे की यात्रा करने की अनुमति प्रदान की। 

Then Akbar said how we will be sure that your Jwala Devi is so powerful and fulfills your wishes. That is why we get your horse's neck cut for the test, if your goddess has the power, then you ask her to get your horse alive again. Thus the neck of the devotee Dhyanu's horse was cut off, then the devotee Dhyanu requested Akbar to secure the head and torso of the horse for a period of one month. Akbar obeyed the devotee Dhyanu and gave him permission to travel further.


अकबर से विदा लेकर ध्यानु भक्त ज्वाला जी मंदिर पंहुचा और देवी से प्रार्थना की, की हे माता आप तो सब कुछ जानती है, बादशाह अकबर मेरी भक्ति की परीक्षा ले रहा है, और उसने मेरे घोड़े की गर्दन कटवा दी है। कृपया मेरी लाज रखें और मेरे घोड़े को फिर से जीवित कर दें।  भक्त ध्यानु की प्रार्थना सुनकर दुर्गा देवी ने ध्यानु को दर्शन दिए और उससे कहा की तुम चिंता मत करो तुम्हारा घोडा दिल्ली में पुनः जीवित हो चुका है, इसलिए तुम चिंता छोड़कर दिल्ली पहुँचो। 

Taking leave of Akbar, devoteev Dhyanu reached the Jwala Ji  temple and prayed to the Goddess, O mother, you know everything, Emperor Akbar is testing my devotion, and he has cut my horse's neck. Please keep my honour and give life to my horse. Hearing the prayers of the devotee Dhyanu, Durga Devi appeared to Dhyanu and told him that you do not worry, your horse has been revived in Delhi, so you leave worry and reach Delhi.

 

दिल्ली में घोड़े के पुनः जीवित होने पर बादशाह अकबर हैरान रह गया, और उसने सेना की एक टुकड़ी ज्वाला जी मंदिर को नस्ट करने के लिए भेजी। ज्वाला जी मंदिर में बिना किसी तेल के ज्योत जलती देखकर अकबर के सैनिक आश्चर्यचकित रह गए। सैनिकों ने पवित्र ज्योति को बुझाने के लिए उनके ऊपर बड़े-बड़े लोहे के तवे रखवा दिए, परन्तु दिव्य ज्योति नहीं बुझी, इसके बाद अकबर के सैनिकों ने पास ही बह रहे झरने का पानी मंदिर तक लाने के लिए एक नहर बनाई और नहर का पानी दिव्य ज्योति के ऊपर गिराया और पुरे मंदिर को जलमग्न कर दिया, परन्तु इससे भी दिव्य ज्योति नहीं बुझी। और अंततः अकबर के सैनिकों की सभी कोशिशें नाकाम हो गयी। इसके बाद सैनिकों ने अकबर को सुचना दी की ज्योति को बुझाने की सभी कोशिशें नाकाम हो चुकी है। 

Emperor Akbar was shocked when the horse was revived in Delhi, and he sent an army troop to destroy the Jwala ji temple. Akbar's soldiers were surprised to see flames burning without any oil in Jwala ji temple. In order to extinguish the holy flame, the soldiers put large iron panes on them, but the divine flame did not extinguish, After this Akbar's soldiers built a canal to bring the water of the nearby waterfall to the temple, and the water of the canal spilled over the divine flame and submerged the entire temple, but it did not extinguish the divine flames. And finally all the efforts of Akbar's soldiers failed. After this, the soldiers informed Akbar that all attempts to extinguish divine flame had failed.

 

ज्वाला जी मंदिर के इस चमत्कार से प्रभावित होकर बादशाह अकबर ने 50 किलो शुद्ध सोने से एक भव्य छत्र बनवाया और उसे लेकर नंगे पाँव ज्वाला जी मंदिर पहुंचा। मंदिर में दिव्य ज्योति के दर्शन करके अकबर नतमस्तक हो गया और देवी को 50 किलो स्वर्ण से बना छत्र भेंट किया, परन्तु जैसे ही अकबर ने छत्र मंदिर भेंट किया छत्र ऊपर एक दिव्य ज्योति प्रकट हुई और सोने से बना छत्र किसी अन्य विचित्र धातु में परिवर्तित हो गया, जो ना लोहा था, ना पीतल था, न तांबा था और ना ही कोई अन्य ज्ञात धातु था। इस प्रकार देवी ने अकबर की यह भेंट अस्वीकार दी। दुर्गा देवी का यह चमत्कार देखकर अकबर ने देवी से अपने गलत कार्यों के लिए अनेक प्रकार से क्षमा याचना की और वापस दिल्ली पंहुचा। दिल्ली पहुंचकर अकबर ने अपने सैनिकों को सभी भक्तों से प्रेमपूर्वक  व्यवहार करने का आदेश दिया। आज भी बादशाह अकबर द्वारा चढ़ाया गया यह छत्र ज्वाला जी मंदिर परिसर में रखा हुआ है।  इस छत्र की धातु का पता लगाने के लिए बहुत सी रिसर्च की गयी परन्तु अभी तक इसकी धातु के प्रकार का पता नहीं लगाया जा सका है।

Impressed by this miracle of Jwala ji temple, Emperor Akbar made a magnificent parasol with 50 kg of pure gold and took it to Jawala ji temple barefoot. Visiting the divine flame in the temple, Akbar bowed down and presented a parasol made of 50 kg of gold to the goddess, but as soon as Akbar presented the parasol to the temple, a divine flame appeared above the parasol and the parasol made of gold turned into another strange metal, which was neither iron, nor brass, nor copper, nor any other known metal. thus The goddess rejected Akbar's offering. Seeing this miracle of Durga Devi, Akbar apologized to the Goddess for her misdeeds and reached Delhi. On reaching Delhi, Akbar ordered his soldiers to treat all devotees with love. Even today, this parasol offered by Emperor Akbar is kept in the Jwala Ji temple premises. A lot of research has been done to find the metal of this parasol but till now its type of metal has not been ascertained.


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