Sunday, December 13, 2020

कैलाश पर्वत का महत्त्व और इसके रहस्य

 कैलाश पर्वत का महत्त्व और इसके रहस्य

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कैलाश पर्वत 
कैलाश पर्वत को हिन्दुधर्म में अत्यंत पवित्र और विशेष पर्वत माना जाता है, हिन्दुधर्म के अनुसार कैलाश पर्वत पर भगवन शिव अपनी पत्नी पार्वती और पुत्रों के साथ निवास करते है, भगवान शिव को हिन्दुधर्म में आदिदेव कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है की सृस्टि का आरम्भ करने वाला, भगवान शिव को देवों के देव महादेव भी कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है की भगवन शिव सभी देवताओ के द्वारा पूजनीय और सर्वाधिक शक्तिशाली देवता है, हिन्दुधर्म में किसी अन्य देवता को इन नामों से नहीं पुकारा जाता। इस प्रकार भगवन शिव का स्थाई निवास स्थान होने के कारण हिन्दुधर्म में कैलाश पर्वत को सबसे विशिष्ट और परम पूज्य पर्वत माना जाता है। 

हिन्दुधर्म में माना जाता है की कैलाश पर्वत पर भगवान शिव 
साक्षात् उपस्थित है, और कैलाश पर्वत के निकट शिव की तपस्या करने से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। कैलाश पर्वत का आकर विशाल शिवलिंग की तरह है, कैलाश पर्वत को बारह ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हजारों सालो से श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए और शांति प्राप्त करने के लिए कैलाश पर्वत के दर्शन करने और कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने के लिए जाते है, माना जाता है की कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने से समस्त पापो का नाश हो जाता है, तथा भगवान शिव की प्राप्ति होती है।

कैलाश पर्वत के आसपास के क्षेत्र 

मानसरोवर झील  

कैलाश पर्वत के पास मानसरोवर नाम की झील है, इस झील का क्षेत्रफल 320 वर्ग किलोमीटर है, मानसरोवर का अर्थ होता है मन का सरोवर, हिन्दुधर्म के अनुसार यह झील अत्यंत पवित्र झील है, इस झील का निर्मण स्वयं ब्रम्हा ने किया था, ऐसा माना जाता है की मानसरोवर झील में सुबह 3 - 4 बजे ब्रम्ह मुहूर्त में सभी देवता स्नान करने आते है, और स्नान करने के बाद कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के दर्शन करने जाते है, हिन्दुधर्म के अनुसार इस झील के दर्शन करने से तथा इसका जल पिने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है, हिन्दुधर्म में इस झील को क्षीरसागर भी कहा जाता है, क्षीरसागर को भगवन विष्णु का निवास भी माना जाता है, यहीं से भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी समस्त संसार का संचालन करते है। कैलाश पर्वत से कुछ दुरी पर गौरीकुंड नाम की एक झील है माना जाता है की गौरीकुंड के के पास देवी पार्वती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए तपस्या की थी।

मानसरोवर झील की विशेस्ताएं 

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राक्षसताल और मानसरोवर 
मानसरोवर झील की अपनी अलग विषेशताएँ है, मानसरोवर झील दुनिया की सबसे अधिक उचाई पर स्थित 320 वर्ग किलोमीटर में फैली मीठे पानी की अति विशाल झील है, इस झील के एकदम पास में राक्षसताल नाम की झील है जिसका पानी बहुत अधिक खारा है। मानसरोवर झील को सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है तथा राक्षसताल को नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मानसरोवर झील का पानी हमेशा शांत रहता है, मौसम चाहे कितना भी ख़राब हो जाये इस झील के पानी में कभी हलचल नहीं होती, इतनी विशाल झील के लिए यह बहुत आश्चर्य की बात है, इसके विपरीत राक्षसताल जो इसके एकदम पास स्थित है, उसके पानी में शांत मौसम होने पर भी हमेशा हलचल होती रहती है लहरें बनती रहती है। मानसरोवर झील के ऊपर कई बार सुबह 3 -4 बजे रहस्यमई रौशनी के गोले दिखाई देते है, जो कैसे बनते है इसका पता नहीं चल सका है, माना जाता इस रौशनी के रूप में देवता इस झील में स्नान करने आते है, इस झील के क्षेत्र में हमेशा ॐ की ध्वनि और डमरू के ध्वनि सुनाई देती रहती है जिसके स्रोत का पता अभी तक नहीं लगाया जा सका है।

कैलाश पर्वत के निकट स्थित रहस्यमयी आश्रम 

हिन्दुधर्म के अनुसार कैलाश पर्वत के आस पास के क्षेत्रों में एक अद्रश्य सिद्ध आश्रम स्थित है, जिसका नाम ज्ञानगंज है। इसे शांगरी-ला, सिद्धाश्रम और शम्भाला जैसे नामों से भी जाना जाता है, कहा जाता है की इस आश्रम में हजारों परमसिद्ध योगी मोक्ष प्राप्त करने के लिए हजारो सालों से तप कर रहें है। इस आश्रम में प्रवेश पाने के लिए भक्ति के एक विशेष स्तर को प्राप्त करना जरुरी होता है, कोई साधारण व्यक्ति इस आश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता बल्कि साधारण व्यक्ति इस आश्रम को देख भी नहीं सकता।

इस प्रकार कैलाश पर्वत और इसके आसपास का संपूर्ण क्षेत्र हिन्दुधर्म में अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थान माना जाता है। 

हिन्दुधर्म के अनुसार कोई साधारण व्यक्ति कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ सकता

हिन्दुधर्म अत्यंत प्राचीन धर्म है, इस धर्म की शुरूआत कब हुई यह अज्ञात है, इस धर्म की मूल पुस्तक वेदों के अनुसार यह धर्म सृस्टि के आरम्भ से ही अस्तित्व में है, हिन्दुधर्म में आदिकाल से ही यह माना जाता है की कैलाश पर्वत भगवन शिव का निवास स्थान है, और इस पर्वत पर केवल वही व्यक्ति चढ़ सकता है जो पाप मुक्त हो, ह्रदय का सच्चा हो, अत्यंत पवित्र हो और भगवन शिव की भक्ति में चरम अवस्था प्राप्त कर चुका हो, यह मान्यता आज के वर्तमान समय में भी कई बार सिद्ध हो चुकी है, क्योकि अनगिनत प्रयास करने के बावजूद आज तक भी कैलाश पर्वत पर कोई नहीं चढ़ पाया है।

कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6638 मीटर है, जो की दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एवेरेस्ट से 2200 मीटर से भी ज्यादा कम है, इसके बावजूद कैलाश पर्वत पर आज तक कोई भी नहीं चढ़ पाया है जबकि माउंट एवेरेस्ट पर हजारो लोग चढ़ चुके है, पर्वतारोहियों के अनुसार कैलाश पर्वत जब भी चढ़ने की की कोशिश की जाती है मौसम अचानक ख़राब हो जाता है, दिशाभ्रम और अवसाद होने लगता है, शरीर कमजोर होने लगता है, किसी भी प्रकार से अचानक ऐसी स्थितियाँ बन जाती है जो चढाई को असंभव बना देती है, ऐसा लगता है जैसे अलौकिक शक्तियाँ नहीं चाहती की कोई भी कैलाश पर्वत पर चढ़े ।

कैलाश पर्वत के रहस्य 

कैलाश पर्वत का आकर पिरामिड के आकर के सामान है, इसका आकर अन्य पर्वतों की तरह शंकु के आकर का नहीं है बल्कि इस पर्वत की चार सतह है जो चार दिशाओं के साथ संरेखित है, हिन्दुधर्म के अनुसार कैलाश पर्वत संसार का केंद्र बिंदु है, तथा कैलाश पर्वत एक ओर से स्फटिक, दूसरी तरफ से माणिक, तीसरी तरफ से स्वर्ण, तथा चौथी तरफ से नीलम का बना हुआ है, इस बात में कितनी सच्चाई है इसका पता तो वैज्ञानिक रिसर्च से ही लगाया जा सकता है, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च के लिए कैलाश पर्वत पर चढ़ना पड़ेगा जो की आज तक संभव नहीं हो पाया है, कैलाश पर्वत पर चढ़ने की आखरी कोशिश 2001 में स्पेन की एक टीम द्वारा की गयी थी उसके बाद चाइनीज़ गवर्नमेंट के द्वारा आधिकारिक तौर पर कैलाश पर्वत पर चढ़ने के प्रयासों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है।

कैलाश पर्वत पर समय की गति तेज हो जाती है, वहाँ पर समय तेजी से बीतता है, कैलाश पर्वत के समीप जाने वाले लोगो के द्वारा और कई रिसर्चरों के द्वारा यह पाया गया है, की कैलाश पर्वत के पास समय बिताने पर बाल और नाख़ून तेजी से बढ़ने लगते है। ऐसा कहा जाता है की एक बार एक साइबेरियाई पर्वतारोहियों का एक समूह कैलाश पर्वत पर चढ़ने को कोशिश कर रहा था, वे एक निश्चित सीमा से ऊपर चढ़ गए और वे सभी तुरंत ही कुछ दशक बूढ़े हो गए जिसके कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा और एक साल से अंदर उन सभी पर्वतारोहियों की बुढ़ापे के कारण मृत्यु हो गयी।

कैलाश पर्वत को धरती के केंद्र माना जाता है यहाँ पर सभी दिशाएँ मिलकर एक हो जाती है तथा यह पर कोई कंपास काम नहीं करता, रूस के वैज्ञानिकों की स्टडी के मुताबिक कैलाश पर्वत एक मानव निर्मित पिरामिड हो सकता है जिसका निर्माण किसी अत्यंत विकसित सभ्यता के लोगो द्वारा किया गया होगा।

कैलाश पर्वत को धरती का एक्सिस मुंडी क्षेत्र माना गया है, एक्सिस मुंडी एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ होता है ब्रह्माण्ड का केंद्र, कैलाश पर्वत पर भौतिक दुनिया और आध्यात्मिक दुनिया मिलकर एक हो जाती है।

कैलाश पर्वत से उत्तरी ध्रुव की दुरी 6666 किलोमीटर है तथा कैलाश पर्वत से दक्षिणी ध्रुव की दुरी 13332 किलोमीटर है, जो की उत्तरी ध्रुव से दुरी का ठीक दोगुना है, यह एक अजीब संयोग है।

इस प्रकार कैलाश पर्वत एक अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी पर्वत है, जहाँ अलौकिक शक्तिओं का प्रवाह होता है, तथा इसमें हिन्दुधर्म के अलावा बौद्धधर्म, जैनधर्म की भी गहरी आस्था है।

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