पोलोनियम (Polonium) के गुण उपयोग और रोचक जानकारी Polonium in Hindi - GYAN OR JANKARI

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Tuesday, July 20, 2021

पोलोनियम (Polonium) के गुण उपयोग और रोचक जानकारी Polonium in Hindi

पोलोनियम (Polonium) के गुण उपयोग और रोचक जानकारी Polonium in Hindi


पोलोनियम (Polonium) का परिचय 

पोलोनियम (Polonium) का वर्गीकरण उपधातु (Metalloid) के रूप में किया जाता है, तथा रासायनिक रूप से  यह एक तत्व है, उपधातु (Metalloid) ऐसे तत्व होते है जो धातु और अधातु दोनों के गुण प्रदर्शित करते है। पोलोनियम का घनत्व 9.4 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है। पोलोनियम का सिंबल Po, परमाणु संख्या 84 तथा परमाणु भार 209 amu होता है। पोलोनियम के परमाणु में 84 इलेक्ट्रान, 84 प्रोटॉन, 125 न्यूट्रॉन और 6 एनर्जी लेवल होते है, तथा आवर्त सारणी (Periodic Table) में  पोलोनियम, ग्रुप 16, पीरियड 6 और ब्लॉक् (P) में स्थित होता है।  पोलोनियम सामान्य तापमान पर ठोस अवस्था में पाया जाता है, इसका गलनांक (पिघलने का तापमान) 254 डिग्री सेल्सियस (489 डिग्री फेरेनाइट) होता है, तथा इसका क्वथनांक (उबलने का तापमान) 962 डिग्री सेल्सियस (1764 डिग्री फेरेनाइट) होता है, इससे अधिक तापमान पर  पोलोनियम, गैस अवस्था में पाया जाता है। 


पोलोनियम की खोज पोलिश केमिस्ट मैरी स्कोलोडोव्स्का क्यूरी, (Marie Sklodowska Curie) ने 1898 में की थी।


 
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Polonium in Hindi

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पोलोनियम (Polonium) के गुण 


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Polonium Properties in Hindi


  • पोलोनियम अत्यंत दुर्लभ सिल्वर-ग्रे रंग का रेडियोएक्टिव ठोस पदार्थ होता है।
  • पोलोनियम अम्लों में घुल जाता है, जबकि क्षार में यह कम घुलनशील होता है। 
  • पोलोनियम-210 अल्फ़ा विकिरण का उत्सर्जन करता है जिसके कारण पोलोनियम के 1 ग्राम टुकड़े का तापमान 500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, इस प्रतिक्रिया के दौरान लगभग 140 वाट बिजली भी उत्पन्न होती है।  
  • पोलोनियम अत्यधिक रेडियोएक्टिव होने के कारण अत्यधिक विषैला भी होता है। 
  • पॉलोनियम एक अत्यंत खतरनाक तत्व है, इसका विघटन होने पर यह अल्फ़ा कणों को मुक्त करता है, ये कण परमाणुओं के आकर के होते है, जो किसी भी कोशिका के संपर्क में आने पर उसे नस्ट कर देते है।
  • पोलोनियम विधुत का सामान्य सुचालक होता है, परन्तु तापमान में वृद्धि के साथ-साथ इसकी विधुत सुचालकता कम होती जाती है। 
  • पोलोनियम को स्वर्ण पन्नी (Gold Foil) में रखने पर इसका विकिरण स्वर्ण पन्नी के बाहर नहीं निकल पाता।   


पोलोनियम (Polonium) के उपयोग 

  • पॉलोनियम अत्यधिक रेडियोएक्टिव होता है इसलिए इसका उपयोग अत्यंत सिमित है।
  • परमाणु रिएक्टर में न्यूट्रॉन का स्रोत बनाने के लिए पोलोनियम - बेरेलियम मिश्रधातु का उपयोग किया जाता है। 
  • पोलोनियम का उपयोग मशीनों में स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी को ख़त्म करने के लिए किया जाता है। 
  • पोलोनियम से अत्यधिक रेडिएशन निकलता है, जिसके कारण इसके एक ग्राम टुकड़े का तापमान 500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, इसलिए इसका उपयोग अंतरिक्ष में उपकरणों के लिए पोर्टेबल हिट सोर्स के रूप में किया जाता है। 
  • फोटोग्राफिक फिल्मों से धूल हटाने के लिए पॉलोनियम युक्त ब्रश का उपयोग किया जाता था। 
  • रिसर्च के लिए पॉलोनियम का उपयोग अल्फ़ा विकिरण के स्रोत के रूप में किया जाता है।


पोलोनियम (Polonium) की रोचक जानकारी 

  • पोलोनियम के सभी 27 आइसोटोप रेडियोएक्टिव होते है। 
  • पोलोनियम एक अत्यंत दुर्लभ तत्व है, प्राकृतिक रूप से यह यूरेनियम अयस्कों में पाया जाता है, एक टन यूरेनियम अयस्क पिचब्लेंड में लगभग 100 माइक्रोग्राम पोलोनियम पाया जाता है, इतनी अल्प मात्रा में होने के कारण यूरेनियम अयस्क से पोलोनियम को प्राप्त करना बहुत अधिक खर्चीला होता है, इसलिए व्यावसायिक रूप से पोलेनियम को प्राप्त करने के लिए परमाणु रिएक्टर में बिस्मथ-209 पर न्यूट्रॉन की बौछार करके बिस्मथ-210 प्राप्त किया जाता है, बिस्मथ-210 की हाफ-लाइफ 5 दिन की होती है, यह बीटा-क्षय के माध्यम से पॉलोनियम-210 में रूपांतरित हो जाता है।  
  • तम्बाकू उत्पाद और सिगरेट के धुंए में अति सूक्ष्म मात्रा में पोलोनियम-210 और सीसा (Lead)  पाया जाता है, जो फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण होता है। इसके अलावा पॉलोनियम-210 जल में घुलनशील होता है, जिसके कारण यह रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य अंगो तक पहुंचकर यकृत और मूत्राशय का कैंसर, पेट में अल्सर, ल्यूकेमिया, ह्रदय रोग और अनुवांशिक क्षति का कारण बनता है। 


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