थैलियम (Thallium) के गुण उपयोग और रोचक जानकारी Thallium in Hindi

थैलियम (Thallium) धातु  के गुण उपयोग और रोचक जानकारी Thallium in Hindi 

 

थैलियम (Thallium) धातु का परिचय 

थैलियम (Thallium) एक धातु है, इसका वर्गीकरण अन्य धातु (Other Metal) के रूप में किया जाता है, तथा रासायनिक रूप से यह एक तत्व है। थैलियम का घनत्व 11.8 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर होता है। थैलियम का परमाणु भार 204.3833 AMU, परमाणु संख्या 81 तथा इसका सिंबल (Tl) होता है। आवर्त सारणी (Periodic Table) में थैलियम, ग्रुप 13, पीरियड 6 और ब्लॉक (P) में स्थित होता है, इसके परमाणु में 81 इलेक्ट्रान, 81 प्रोटोन, 123 न्यूट्रॉन तथा 6 एनर्जी लेवल होते है। सामान्य तापमान पर थैलियम धातु ठोस अवस्था में पाया जाता है, इसका गलनांक (पिघलने का तापमान) 304 डिग्री सेल्सियस (579 डिग्री फेरेनाइट) और इसका क्वथनांक (उबलने का तापमान) 1473 डिग्री सेल्सियस (2683 डिग्री फेरेनाइट) होता है, तथा इससे अधिक तापमान पर थैलियम धातु गैस अवस्था में पायी जाती है।

 

थैलियम की खोज इंग्लिश केमिस्ट सर विलियम क्रूक्स (Sir William Crookes)  ने 1861 में की थी।

 

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Thallium in Hindi

थैलियम (Thallium) धातु के गुण 

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Thallium properties in Hindi
  • थैलियम सिल्वर-सफ़ेद रंग की नर्म धातु है, यह इतना नरम होता है, की इसे साधारण चाकू की मदद से भी बड़ी आसानी से काटा जा सकता है।
  • थालियम एक अत्यंत विषैला पदार्थ होता है, यह टेरटोजेनिक (भ्रूण के विकास को बाधित करने वाला) और कार्सिनोजेनिक (कैंसर कारक) होता है।
  • थैलियम विधुत और ऊष्मा का अच्छा सुचालक होता है। 
  • इंफ्रारेड प्रकाश के संपर्क में आने पर थैलियम की विधुत सुचालकता प्रभावित होती है। 
  • शुद्ध थैलियम के हवा में उपस्थित ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर इसके ऊपर काले रंग की परत जम जाती है, जिसे थैलियम ऑक्साइड (Ti2O) कहते है। 
  • थैलियम रासायनिक रूप से अत्यधिक सक्रीय तत्व होता है।
  • थैलियम सल्फ्यूरिक एसिड, हाइड्रोक्लोरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड में घुल जाता है।

 

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थैलियम (Thallium) धातु के उपयोग 

  • थैलियम अत्यंत विषैला तत्व है, इसलिए इसके उपयोग भी अत्यंत सिमित है। 
  • थैलियम का उपयोग फोटोइलेक्ट्रिक सेल्स बनाने में किया जाता है। 
  • कुछ दशकों पहले थैलियम सल्फेट का प्रयोग चूहे मरने के जहर के रूप में किया जाता था, यह एक गंधहीन और स्वादहीन पदार्थ होता है। 
  • थैलियम ऑक्साइड का उपयोग उच्च परावर्तन क्षमता वाले और कम तापमान पर पिघलने वाले विशेष कांच बनाने में किया जाता है। 
  • 8% थैलियम और पारे की मिश्रधातु का गलनांक शुद्ध पारे से 20 डिग्री सेल्सियस कम होता है, इसलिए इस मिश्र धातु का उपयोग कम तापमान मापने वाले थर्मामीटर में किया जाता है।
  • इंफ्रारेड विकिरण का पता लगाने वाले उपकरणों में थैलियम सल्फाइड, थैलियम ब्रोमाइट और थैलियम आयोडाईट का प्रयोग किया जाता है। 

 

थैलियम (Thallium) धातु की रोचक जानकारी 

  • पृथ्वी की पपड़ी में थैलियम 60 वॉ सबसे प्रचुर तत्व है।
  • अधिकांश थैलियम को तांबा, जस्ता और सीसा धातुओं के उत्पादन के दौरान एक उप-उत्पाद के रूप में प्राप्त किया जाता है। इसके अलावा समुद्र तल पर पाये जाने वाले मैंगनीज़ नोड्यूल्स में भी थैलियम पाया जाता है। 
  • थैलियम के संपर्क में आने पर यह मानव शरीर द्वारा बहुत आसानी से अवशोषित कर लिया जाता है, जिसके अत्यंत गंभीर परिणाम हो सकते है।  मानव शरीर में थैलियम कैंसर कारक होता है, यह भ्रूण के विकास को भी बाधित करता है, इसके अलावा यह तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति पंहुचा सकता है। अत्यधिक गंभीर मामलों में मृत्यु भी हो सकती है। थैलियम की विषाक्तता से बच जाने के बाद भी तंत्रिका तंत्र की क्षति को पुनः ठीक नहीं किया जा सकता, जिसके कारण लकवा, हाथ-पैरों का काँपना और व्यवहार में परिवर्तन जैसे लक्षण जीवन पर्यन्त दिखाई दे सकते है। 
  • थैलियम रासायनिक रूप से अधिक सक्रीय है, हवा की उपस्थिति में इसके ऊपर काले रंग की ऑक्साइड की परत जम जाती है, इसलिए थैलियम को खनिज तेल में डुबाकर स्टोर किया जाता है।
  • थालियम के कुल 25 ज्ञात आइसोटोप होते है, जिनमें से केवल 2 ही स्थिर होते है। 

 

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